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Bye Laws Notary (1)

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Bye Laws Notary (5)

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Bye Laws Notary (7)

Bye Laws Notary (8)

 

  


 

Bye Laws Notary (9)

Pan Card

 

 

  

 



 

Audit Report 2018 (1)

Audit Report 2018 (2)

  

  

 

Audit Report 2018 (3)

Audit Report 2018 (4)

 

  


  


Audit Report 2018 (5)

Swayam Sahara R.N.I. Letter

 

 

 
 



 

Intimations To Authorities

Yojna Aayog Letter

Chief  Minister Letter

 

 

Letter To Collector

Letter To S.P. Police

 

  

Changing Correspondence Letter

Section 27-28 Updation Letter

  

  

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Moral Support

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Enquiry By PMO

 

 

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संस्था एवं ‘स्वर्णिम भारत निर्माण परियोजना’ 

के राश्ट्रीय स्तर पर संचालन हेतू


दिषा निर्देष, नियम व षर्तें


     वर्तमान संविधानानुसार राश्ट्रीय प्रबंधकारिणी समिति 7 सदस्यों की है। जिनका विवरण दिनंाक 22/07/2018 की चुनाव सभा के अनुसार वैबसाइट पर उपलब्ध है। भविष्य में वैधानिक नियमों का पालन करते हुए प्रबंधकारिणी समिति का विस्तार भी प्रस्तावित है।


     परियोजना एवं संस्था के समस्त उद्देष्यों की पूर्ति हेतू आंतरिक नियमावली तैयार की गयी है जिसका संक्षिप्त विवरण निम्नरूपेण है। 


     संपूर्ण भारत में प्रत्येक जनपद एवं जिले में उपसमितियों का गठन किया जायेगा। उपसमितियों में न्यूनतम 10 और अधिकतम आवष्यकतानुसार सदस्य होंगे। उपसमितियों के अतिरिक्त प्रत्येक स्तर पर कोर कमेटीयों का भी गठन किया जायेगा। कोर कमेटी में सदस्यों की संख्या असिमित होगी। कोर कमेटीयों की अध्यक्षता उस स्तर की उपसमिति के अध्यक्ष करेंगे एवं प्रत्येक महत्वपूर्ण विशयों में उपस्थित सदस्यों के आधार पर दो तिहाई मतों से निर्णय पारित होंगे। इनकी नियमावली उपसमिति के गठन के समय राश्ट्रीय प्रबंधकारिणी द्वारा प्रदान की जायेगी। सभी विचाराधीन विशयों में अध्यक्ष का निर्णय मान्य होगा, जिसमें संषोधन करने का एकाधिकार राश्ट्रीय समिति को है।


राश्ट्रीय प्रबंध कारिणी समिति एवं कोर कमेटी


     इसके लिये सदस्य की आयु 18 वर्श पूर्ण होनी आवष्यक है और वर्तमान नियमानुसार रू. 5000/- (रूपये पाॅच हजार मात्र) की दानराषि एवं निर्धारित षपथ-पत्र, निर्धारित दस्तावेजों के साथ प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।


     विभिन्न प्रदेषों के प्रभारी अथवा विभिन्न प्रकार के महत्वपूर्ण पदाधिकार कोर कमेटी के सदस्यों को ही प्रदान किये जायेंगे तथा आवष्यकतानुसार राश्ट्रीय प्रबंधकारिणी का विस्तार करने पर कोर कमेटी के सदस्यों को प्राथमिकता प्रदान की जायेगी।


     कोर कमेटी के सदस्यों की सदस्यता राश्ट्रीय प्रबंधकारिणी द्वारा मान्य/अमान्य की जायेगी एवं मान्य होने पर संपूर्ण नियमावली एवं सभी संबंधित दस्तावेजों की फाईल सदस्यों को प्रदान की जायेगी।


प्रदेश स्तरीय प्रबंधन


     प्रदेष की उपसमितियंा नहीं बनेगी अपितू राश्ट्रीय कोर कमेटी से प्रभारी नियुक्त होंगे। प्रदेष प्रभारी जिला उपसमितियों से विषेश आमंत्रित सदस्यों के रूप में उपयुक्त सदस्यों का चुनाव अपनी कोर कमेटी हेतू स्वविवेक से आवष्यकतानुसार संख्या में कर सकेंगे और कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय उपस्थित सदस्यों के दो तिहाई बहुमत से पारित कर राश्ट्रीय समिति को संस्तुति हेतू प्रेशित कर सकेंगे। प्रदेष प्रभारी का मत निर्णायक होगा मगर आवष्यकता होने पर राश्ट्रीय समिति द्वारा संषोधित किया जा सकेगा। इसकी पूर्ण नियमावली प्रदान की जायेगी।


जिला स्तरीय उपसमितियंा एवं कोर कमेटी एवं आजीवन सदस्यता


     इस स्तर पर रू. 2100/- (रूपये इक्कीस सौ मात्र) का आजीवन सदस्यता षुल्क निर्धारित किया गया है। जिला स्तरीय उपसमिति में भी न्यूनतम 10 एवं अधिकतम आवष्यकतानुसार सदस्य होंगे तथा कोर कमेटी में असिमित सदस्य हो सकते हैं। जिला स्तरीय कोर कमेटी में जिला स्तरीय आजीवन सदस्य एवं अंतर्गत आने वाले जनपद स्तरीय सदस्य बिना अतिरिक्त षुल्क के लिये जा सकते हैं और ये विषेश आमंत्रित सदस्य कहलायेंगे। कोर कमेटी की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष ही करेंगे।


जनपद स्तरीय उपसमितियंा, कोर कमेटी एवं आजीवन सदस्यता


     इस स्तर पर रू. 1100/- (रूपये ग्यारह सौ मात्र) का आजीवन षुल्क निर्धारित किया गया है। इस उपसमिति में न्यूनतम 10 एवं अधिकतम आवष्यकतानुसार सदस्य रहेंगे। जनपद स्तरीय कोर कमेटी में उपसमिति के विवेकानुसार आजीवन सदस्यों के अतिरिक्त स्वतंत्र प्रभार के परियोजना समन्वयकों को आमंत्रित सदस्य के रूप में बिना अतिरिक्त षुल्क के असिमित संख्या में लिया जा सकता है।


विभिन्न स्तरीय सम्माननीय संरक्षक सदस्य


     सभी उपसमितियों को अधिकार होगा कि वे संबंधित क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों को सम्माननीय संरक्षक सदस्य बना सकेंगे। इनकी कोई सीमा नहीं होगी। ना ही इनके लिये कोई दानराषि निर्धारित की गयी है। यद्यपि केवल वो लोग ही सम्माननीय संरक्षक सदस्य चुने जा सकेंगे जो लिखित रूप में संस्था एवं इसकी गतिविधियों को नैतिक समर्थन प्रदान करेंगे और न्यूनतम रू. 250/- की दानराषि देकर संस्था में स्वयं सेवक का पंजीकरण करायेंगे।


     किसी भी स्तर के सम्माननीय संरक्षक सदस्यों को निर्णायक विशयों में मताधिकार प्राप्त नहीं होगा। अपितू समारोह एवं सामाजिक कार्यक्रमों में सर्वोच्च मंच पर आसीन करते हुए सामूहिक सम्मान किया जायेगा।


विभिन्न स्तरीय संरक्षक सदस्य/संरक्षक मंडल


     हमारे वर्तमान संविधानुसार संरक्षक सदस्य के लिए न्यूनतम रू. एक लाख की दानराषि निर्धारित है। लोकार्पण कार्यक्रम में इस दानराषि को बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया जाना प्रस्तावित है।


     लोकार्पण कार्यक्रम के पष्चात् जनपद स्तरीय संरक्षक सदस्य हेतू रू. 1 लाख, जिला स्तरीय संरक्षक सदस्य हेतू रू. 3 लाख और राश्ट्रीय समिति के संरक्षक सदस्य के लिए दानराषि रू. 11 लाख का प्रस्ताव पारित करना प्रस्तावित है।


     अतः रू.1100/- मात्र की दानराषि प्रदान करके जनपद स्तरीय आजीवन सदस्यता ली जा सकती है तथा रू. 2100/- से जिला स्तरीय और रू. 5000/- से राश्ट्रीय स्तर की आजीवन सदस्यता वर्तमान में ली जा सकती है।


जनपद जिला एवं राश्ट्रीय स्तर की प्रबंध कारिणी समिति में आने के लिए निर्धारित षर्तें एवं नियम


     सर्वप्रथम उपसमिति में आने के लिए व्यस्क होना आवष्यक है इसके अतिरिक्त किसी प्रकार के नषे का आदि न हो और सामाजिक/राजनैतिक मानसिकता होना आवष्यक है तथा सर्वधर्मसंभाव, सर्वसमाज संभाव की सोच होना अति आवष्यक है।


     उपरोक्त के अतिरिक्त जनपद स्तर पर रू. 11000/- (रू. ग्यारह हजार मात्र) एवं जिला स्तर पर रूपये 21000/- (रूपये इक्कीस हजार मात्र) प्रत्येक सदस्य को संस्था में जमानत राषि के रूप में जमा कराना आवष्यक है।


     कोर कमेटी के लिए आजीवन षुल्क के अतिरिक्त कोई भी जमानत राषि का प्रावधान नहीं है, यद्यपि स्वेच्छा से जमानत राषि प्रदान की जा सकती है।


जमानत राषि का वापिसी का प्रावधान


     अगर उपसमितियों की प्रबंधकारिणी का कोई सदस्य स्वेच्छा से त्याग पत्र देता है अथवा किसी भी उचित कारण से निश्कासित किया जाता है और उसका त्यागपत्र अथवा निश्कासन मुख्य कार्यालय द्वारा स्वीकृत कर लिया जाता है तो उसकी जमानत राषि वापिस कर दी जायेगी। ज्ञात रहे संस्था को छोड़ रहे सदस्य/पदाधिकारी की जगह दूसरा व्यक्ति नियुक्त होने पर ही जमानत राषि का वापिसी का प्रावधान है।


जनपद एवं जिला स्तरीय


उपसमितियों को देय पैकेज


     न्यूनतम 10 सदस्यों की उपसमिति को जनपद स्तर पर एक डैस्कटाॅप कम्प्यूटर, एक ब्लैक/व्हाईट लेजर प्रिंटर, 200 से 300 उपहार पैकिट, 8ष् ग 4ष् का बैनर, 1000 सदस्यता फार्म, विवरणिका के 100 सैट और लगभग 500 प्रचारक सामग्री प्रदान की जाती है। इसका कोई अतिरिक्त षुल्क नहीं लिया जाता। ये जमानत राषि के एवज में प्रदान की जाती है।


     इसी प्रकार जिला स्तरीय उपसमिति को जिसमें न्यूनतम 10 सदस्य होंगे, 1 डैस्क टोप, 1 कलर प्रिंटर, लगभग 500 उपहार, बैनर एवं प्रत्येक जनपद के योग से 10 गुना मुद्रित सामग्री प्रदान की जायेगी।


उपसमितियों का उद्घाटन


     बिना स्थानीय संरक्षक के किसी भी उपसमिति का उद्घाटन कार्यक्रम संभव नहीं होगा। यद्यपि उपसमिति गठित होने पर मुख्य प्रषासनिक कार्यालयों को लिखित सूचना प्रदान कर दी जायेगी और संस्था की गतिवियंा प्रारम्भ की जा सकती है।


उद्घाटन कार्यक्रमों के खर्चों आदि का प्रबंधन


     यद्यपि उपसमिति के सदस्यों के आपसी संग्रहण/योगदान से आवष्यक धनराषि एकत्रित करके और संस्था के सहयोग से उद्घाटन कार्यक्रम करना संभव है मगर ऐसा करना हितकर नहीं है। बिना संरक्षक के उपसमिति पंगु होकर रह जायेगी।


     अतः यह निष्चित किया गया है कि जनपद एवं जिला स्तरीय उपसमितियों के कार्यालय उद्घाटन कम से कम 100 स्वयंसेवक पंजीकृत करने के बाद ही किया जाये जिसके लिए जनपद स्तर पर कम से कम 1 लाख एवं जिला स्तर पर कम से कम रू. 2.5 लाख की दानराषि संरक्षक सदस्य से अपेक्षित की गई है। स्वयं सेवक नहीं होंगे तो कार्यक्रम भी कैसे होंगे।


     जनपद स्तरीय समिति के संरक्षक जनपद पंचायत अध्यक्ष, विधायक अथवा इनके समकक्ष सामाजिक क्षमता वाले व्यक्ति को बनाना हमारी प्राथमिकता है। इसी प्रकार जिला स्तरीय उपसमिति के संरक्षक हेतू जिला पंचायत अध्यक्ष, सांसद अथवा इनके समकक्ष व्यक्ति को आमंत्रित किया जाना चाहिए।


     जनपद एवं जिला स्तरीय उपसमितियों के सम्माननीय संरक्षकों हेतू जहाॅ तक संभव हो जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत सदस्यों अथवा इनके समकक्ष व्यक्तियों तथा क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों को आमंत्रित किया जाना हित कर रहेगा।


     उपसमितियंा स्थानीय षासन - प्रषासन से विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं अनुदान हेतू मान्य रहेगी तथा इस विशय पर पूरा मार्गदर्षन, मुख्य कार्यालय द्वारा प्रदान किया जायेगा।


‘स्वर्णिम भारत निर्माण राश्ट्रीय परियोजना’


परिचय - संस्था द्वारा संचालित उपरोक्त परियोजना का लगभग 10 वर्शों के कठिन परिश्रम के पष्चात् एक ऐसा माॅडल तैयार किया गया है जिसमें मूलतः जरूरतमंद लोगों के लिए निरंतर आर्थिक सहायता उपलब्ध करायी जायेगी। यह आर्थिक मदद षिक्षा, चिकित्सा, व्यवसाय, गृह निर्माण, पषुपालन एवं अन्य समाजोत्थान कार्यों हेतू एक कम्प्यूटराईज्ड योजना एवं गणना के द्वारा प्रदान की जायेगी। परियोजना, ‘स्ववित्तपोशित’ आधार पर संचालित होने वाला, ‘सामाजिक, व्यापारिक, विधिक, मीडिया एवं राजनीतिक’ गतिविधियों का मिला जुला स्वरूप है।


     ये आर्थिक मदद अनुदान के रूप में प्रदान की जायेगी तथा इसकी कुछ निर्धारित षर्तें हैं। सर्वप्रथम षर्त है कि पंजिकृत व्यक्ति को स्वयं और अगर वह अवयस्क है तो उसके अभिभावक को अथवा संस्था के पंजिकृत सामाजिक कार्यकत्र्ता को जोकि उसका प्रायोजक हो कम से कम 5 जरूरतमंद व्यक्तियों का स्वयं सेवक समूह बनाकर न्यूनतम एक सामाजिक गतिविधि करनी होगी। जैसे एक पौधारोपण करना, नषे या अन्य सामाजिक बुराई के विरूद्ध प्रचार करना। सामाजिक गतिविधियों की सूची भी यहां प्रकाषित की जा रही है। कार्यकत्र्ता को गतिविधि का भी प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। 


     योजना का डिजाइन इस प्रकार तैयार किया गया है कि लोगों को धीरे - धीरे व्यवसायिक सामाजिक कार्यकत्र्ता के रूप में विकसित किया जायेगा और किये गये सामाजिक कार्यों के अनूरूप उनके व्यक्तिगत अनुदान खाते में उपलब्धता के आधार पर आर्थिक मदद प्रदान की जाती रहेगी।


     एक सामाजिक कार्यकत्र्ता के अनुदान खाते की वर्तमान योजनानुसार अधिकतम सीमा रू. 10 लाख तक है। तथा एक माह में अधिकतम 25000/- रूपये तक का अनुदान प्राप्त किया जा सकता है बषर्ते की योजनानुसार अनुदान खाते में राषि उपलब्ध हो और सामाजिक कार्यकत्र्ता के लिये निर्धारित सभी षर्तों का योजनानुसार पालन किया गया हो।


स्वर्णिम भारत निर्माण परियोजना


में पंजीकरण की प्रक्रिया


मूलतः गरीबी उन्मूलन हेतू डिजायन की गई इस योजना में पंजीकरण हेतू न्यूनतम रू. 250/- (रूपये दो सौ पचास मात्र) की दानराषि संस्था में प्रदान करते हुए अपना नाम, पिता/पति का नाम, पता और संपर्क नंबर देना होता है। ईमेल वंाछनीय है। इसके अतिरिक्त किसी भी दस्तावेज की आवष्यकता नहीं होती।


     यह दानराषि कदापि वापिस देय नहीं है। इस प्रकार पंजीकरण करके एक अनुदान खाता नंबर एवं उसका पासवर्ड कम्प्यूटर द्वारा जारी कर दिया जाता है। तथा दिये गये मोबाइल नंबर पर संदेष प्रदान कर दिया जाता है। प्रदान की गई दानराषि की भी पावती कम्प्यूटर द्वारा जारी की जाती है।


     अगर कोई जरूरतमंद है और निर्धारित दानराषि रू. 250/- नहीं है अथवा कम है तो भी पंजीकरण कराया जा सकता है। मगर संस्था से अनुदान प्राप्त करते समय रू. 250/- की दानराषि पूर्ण करना आवष्यक होगा।


     प्रत्येक पंजीकृत दानदाता को संस्था द्वारा एक उपहार जैसे बैग, साड़ी, कपड़ा, कोई घरेलू सामान, पेन कार्ड रसीद आदि प्रदान किया जाता है। ध्यान रहे ये उपहार केवल तब ही मिलता है जब दानराषि रू. 250/- पूर्णरूपेण दी गई हो। कई बार देखा गया है दानदाता कोई ऐसा उपहार की इच्छा रखता है जो संस्था में उपलब्ध नहीं होता तो उन्हें एक नकद उपहार वाऊचर देने का भी प्रावधान है ताकि वो अपनी मनपसंद उपहार क्रय कर सकें।


     अनुदान खाते में राषि एक कम्प्यूटराईज्ड प्रक्रिया से आती है अतः यह कह पाना संभव नहीं है कि जो आज पंजीकरण करा रहे हैं उन्हें कब अनुदान मिलना प्रारंभ होगा। इस जानकारी के लिये उन्हें उचित प्रषिक्षण लेना होता है।


परियोजना समन्वयक की पंजीकरण प्रक्रिया


मूल पंजीकरण के पष्चात् जो लोग एक व्यवसायिक सामाजिक कार्यकत्र्ता के रूप में स्थापित होना चाहते हैं उन्हें परियोजना समन्वयक के लिए पंजीकरण कराकर परियोजना संचालन का पूर्ण प्रषिक्षण प्राप्त करके लिखित एवं मौखिक परीक्षा उत्र्तीण करके क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से कार्य करने का प्रमाण - पत्र लेना होता है।


ये 2 दिवसीय आवासीय प्रषिक्षण होता है इसमें योजना की तकनीकी जानकारी एवं प्रयोगात्मक प्रषिक्षण सम्मिलित है। परियोजना समन्वयक के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्श से अधिक होनी आवष्यक है। स्वयं का कम्प्यूटर/लैपटाप/प्रिंटर/एन्ड्राॅयड फोन/वाहन अगर है तो प्राथमिकता दी जाती है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में अधिकतम 1 स्वतंत्र प्रभार परियोजना समन्वयक नियुक्त किया जाता है। प्रषिक्षण कार्यक्रम उपलब्ध प्रषिक्षुओं की संख्या एवं क्षेत्र के अनुसार निष्चित किया जाता है। प्रषिक्षण निषुल्क है मगर खाने खर्चें एवं आवास हेतू निर्धारित षुल्क प्रदान करना होता है।


परियोजना समन्वयक को एक पैकेज प्रदान किया जाता है जिसमें न्यूनतम 40-50 उपहार पैकैज 25-50 पुस्तिकाएं बैनर एवं अन्य जरूरी प्रचार सामग्री होती है तथा साथ ही संपूर्ण प्रपत्रों की फाईल प्रदान की जाती है। इसके लिए रू. 2000/- (रू. दो हजार मात्र) की दानराषि केवल एक बार निर्धारित की गयी है और पैकैज के लिए रू. 10,000/- की वापिस देय जमानत राषि ली जाती है। आवष्यकता होने पर दिया गया पैकैज संस्था को वापिस करके जमानत राषि ली जा सकती है।


परियोजना समन्वयक के लिए 1 पासपोर्ट साईज फोटो, आधार कार्ड/ड्राईविंग लाईसेंस/वोटर कार्ड में किसी 1 की फोटो काॅपी और षिक्षा प्रमाण - पत्र एवं अन्य उपलब्धियंा अगर हैं तो उनके प्रमाण पत्रों की फोटो काॅपियां आवष्यक होती हैं।


परियोजना समन्वयकों को आवष्यकतानुसार संस्था द्वारा संचालित पत्र - पत्रिकाओं का प्रेस कार्ड, एवं संबंधित जनपद स्तरीय उपसमिति में विषेश आमंत्रित आजीवन सदस्यता भी निषुल्क उपहार स्वरूप प्रदान की जाती है।


अनुदान खातों का निरस्तीकरण/दानराषि 

की वापसी की प्रक्रिया


यह सूचित किया जाता है कि संस्था में प्रदान की गयी दानराषि, स्वयं सेवक, परियोजना समन्वयक, आजीवन सदस्यों के पंजीकरण हेतू अथवा अन्य रूप में प्रदान की गयी हो कदापि वापिस देय नहीं है।


कोई भी अनुदान खाता अगर एक बार कम्प्यूटर द्वारा जारी कर दिया जाता है तो उसके निरस्तीकरण का कोई प्रावधान नहीं है यद्यपि अनुदान खातों में नाम परिवर्तन किया जा सकता है। अर्थात कोई व्यक्ति आपसी समझौते के साथ षपथ पत्र, स्थानंातरण षुल्क एवं फाईल आदि का खर्चा देकर अपना अनुदान खाता किसी अन्य को प्रदान करा सकता है और उससे प्राप्त दानराषि स्वयं रख सकता है।


प्रदान किये जाने वाले उपहारादि केवल एक बार ही प्रदान किये जाते हैं दोबारा नाम परिवर्तन के समय प्रदान नहीं किये जाते हैं।


अनुदान खातों पर रोक/अनुदान राषि का निरस्तीकरण की प्रक्रिया/अनुदान की 

मासिक एवं अंतिम सीमा


रू. 250/- की दानराषि प्रदान करने पर जो अनुदान खाता हमारे कम्प्यूटर सिस्टम द्वारा जारी किया जाता है उसकी अधिकतम सीमा रू. 10 लाख निर्धारित की गयी है अतः एक व्यक्ति को अधिकतम रू. 10 लाख का अनुदान कदम दर कदम, उपलब्ध कराने का प्रावधान है। यह पूरी राषि खाते में आने के बाद स्वतः खाता बंद हो जायेगा।


खाते में रू. 500/- जमा होने तक खाते को ऐक्टिवेट करना आवष्यक होगा वरना राषि आती तो रहेगी मगर निरस्त होती रहेगी। ऐक्टिवेषन की प्रक्रिया प्रषिक्षण प्राप्त परियोजना समन्वयक से जानी जा सकती है अथवा स्वयं प्रषिक्षण प्रक्रिया में षामिल हो सकते हैं। विदित हो अनुदान राषि केवल सामाजिक गतिविधियों और व्यक्तिगत विकास के कार्यों हेतू ही प्रदान की जायेगी।


अगर कोई स्वयंसेवक/सामाजिक कार्यकत्र्ता जानकारी देने के उपरंात भी अपनी राषि को लेने की प्रक्रिया का पालन नहीं करता, अथवा राश्ट्र विरोधी, समाज विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है, अनुषासनहीनता करता है, कोई धोखाधड़ी पूर्ण कार्य करता है अथवा देष के कानून के विरूद्ध कोई भी कर्म करता है तो उसके अनुदान खाते पर रोक लगा दी जायेगी। आवष्यक समझाईष के पष्चात् भी नहीं मानेंगे तो अनुदान खाते को किसी अन्य जरूरतमंद को स्थानंातरित किये जाने का एकाधिकार परियोजना प्रभारी/प्रबंधन समिति के पास सुरक्षित है।


परियोजना समन्वयकों/ आजीवन सदस्यों/ ऋण दाताओं के लिए अतिरिक्त आय के स्रोत


परियोजना समन्वयक स्वतंत्र रूप से अपनी षाखाएं चलाकर अपने समूह के माध्यम से सामाजिक गतिविधियंा करते हैं, नये स्वयं सेवकों का पंजीकरण करते हैं। परियोजना को इस प्रकार तैयार किया गया है कार्यकत्र्ताओं को अनुदान के अतिरिक्त मानदेय राषियंा भी उपलब्ध करायी जाती हैं। मानदेय राषि की न्यूनतम कोई सीमा नहीं है क्योंकि यह किये गये कार्य के अनूरूप है मगर अंतिम सीमा रू. 50,000/- प्रतिमाह है।


आजीवन सदस्यों के लिये भी एक अलग फंड बनाया गया है जिसका विवरण उपसमितियों की नियमावली में उपलब्ध है।


अगर संस्था किसी से कोई राषि ऋण रूप में लेती है तो ब्याज सहित वापिसी का सहमति पत्र ऋणदाता को उपलब्ध कराया जाता है।


आन लाईन पंजीकरण एवं दानराषि


प्रदान करने की प्रक्रिया


वैब साईट के होम पेज पर स्वयं सेवक का अस्थाई रजिस्ट्रेषन किया जा सकता है। कम्प्यूटर द्वारा जारी पंजीकरण क्रमंाक हमारे वैब साईट पर दिये गये ‘कंाटेक्ट’ से मोबाईल नं. पर संदेष द्वारा भेजा जा सकता है। मूल दानराषि संस्था के बैंक खाते में जमा करके प्रमाण व्हाट्सएप किया जा सकता है अथवा ईमेल किया जा सकता है।


स्थायी पंजीकरण करके अनुदान खाता क्रमंाक और पासवर्ड भेज दिया जायेगा। 

संस्था का खाता ‘जन संसाधन विकास एवं जीव कल्याण समिति’ के नाम से पंजाब नेषनल बैंक, नरसिंहपुर (म.प्र.) में है। खाता क्रमंाक 2720001700001552 है तथा आई.एफ.एस. कोड च्न्छठ0272000है।

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सार्वजनिक सूचना एवं अपील


हर्ष के साथ सूचित किया जाता है कि संस्था ‘जन संसाधन विकास एवं जीव कल्याण समिति’ द्वारा स्वपोषित - स्वरोजगार गरीबी उन्मूलन राष्ट्रीय परियोजना एवं अन्य सामाजिक गतिविधियों का संचालन पूर्णतः कानून के दायरे में रहते हुए किया जा रहा है। संस्था उच्च कोटि का सामाजिक कार्य अर्थात बेरोजगारी को समूल नष्ट करने हेतू कटीबद्ध हैं और सभी राज्य सरकारों, केंद्र सरकार, राजनेता, जन प्रतिनिधि, समाजसेवी एवं सर्वसाधारण से पूर्ण सहयोग की आशा रखते हैं।


        परियोजना की रूपरेखा, संस्था के नियम विनियम एवं प्रमाण पत्र आदि की प्रतियाॅ केन्द्रीय योजना आयोग एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों को प्रेषित की जा चुकी हैं। आशा हैं कि सभी वर्ग के लोग हमें सहायता प्रदान कर कृतार्थ करेंगें। अगर कोई व्यक्ति जनता से, संस्था से कोई धनराशि का गबन/दुरूपयोग करेगा/कुछ भी गैर कानूनी काम करेगा/संस्था की योजनाओं की आंशिक/पूर्णरूपेण नकल करेगा/काॅपी राईट अधिनियम का उल्लंघन करेगा तो उसके ऊपर त्वरित कानूनी कार्यवाही की जायेगी। अगर किसी व्यक्ति/संस्था/संगठन द्वारा बिना किसी लिखित पूर्व सूचना के/बिना किसी प्रमाण के संस्था को बदनाम किया जायेगा/विरोधाभासी प्रचार किया जायेगा तो संस्था के हित एवं इसमें जुड़े हजारों स्वंय सेवकों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए आर्थिक हानि एवं मानहानि का दावा किया जा सकता है।


       जैसा कि बेरोजगारी आज के समय में सबसे भयंकर सामाजिक बुराई है और संस्था इसको समाप्त करने के लिए लड़ाई लड़ रही है। तो प्रत्येक आम और खास व्यक्ति से प्रार्थना है कि संस्था का सहयोग करें। स्वंय इसमें जुड़े इस परियोजना को गंभीरता पूर्वक समझें और अगर संस्था ठीक हैं तो इसमें हमें सहयोग करें और अगर संस्था कहीं गलत हैं तो आपके सुझाव एवं मार्गदर्शन अपेक्षित हैं क्योंकि संस्था गरीबी, भूखमरी, बेरोजगारी, अशिक्षा जैसी भयंकर सामाजिक बुराईयों को समूल नष्ट करना चाहती है। संस्था के लिए सभी राजनेता, राजनैतिक पार्टियाॅ सम्माननीय हैं।


संस्था का न्यायिकक्षेत्र संस्था के सुविधानुसार तय किया जायेगा जो वर्तमान में जबलपुर, मध्यप्रदेश है।


       आशा करता हॅू की इस असंभव से प्रतीत होने वाले कार्य में आप सभी यथायोग्य सहयोग करेंगें।


                                                                                                                                                                                शुभाकांक्षी


                                                 एड. राजमणि सिंह सिंगरौल


                                                 (राष्ट्रीय विधि सलाहकार)


                                                  हाईकोर्ट, जबलपुर (म.प्र.)


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अन्य नियम षर्तें और अधिक जानकारी के लिए हमारी पत्रिका ‘आओ चलें साथ - साथ, सफलता के कुछ कदम’ को पढ़िए।


 


प्रश्न 1:- ‘षुभाकंाक्षा’ क्या है?


उत्तर:- ‘षुभाकंाक्षा’, सामाजिक संस्था, जन संसाधन विकास एवं जीव कल्याण समिति’ द्वारा, ‘स्ववित्तपोषित - स्वरोजगार’ के आधार पर संचालित राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन परियोजना है। परियोजना का मूल उद्देष्य समस्त भारत वासियों के अंतरमन में राष्ट्र हित की गतिविधियों का संचालन करना है। यह गरीबी, बेरोजगारी और अषिक्षा जैसी भयंकर सामाजिक बुराईयों के उन्मूलन के साथ ‘स्वर्णिम भारत निर्माण’ की एक अभूतपूर्व, अनन्य परियोजना है।


प्रश्न 2:- स्ववित्तपोषित और स्वरोजगार से क्या तात्पर्य है?


उत्तर:- रोजगार अथवा आर्थिक मदद पाने के इच्छुक व्यक्तियों द्वारा दी गई दानराषि और किसी भी प्रकार की दान, अनुदान राषि से ही इस योजना का पोषण अर्थात संचालन होता है और दानदाताओं को ‘स्वर्णिम भारत निर्माण’ की गतिविधियों में शामिल करते हुए उनके लिए रोजगार और आर्थिक मदद के विकल्प तैयार किये गये हैं।


प्रश्न 3:- संस्था के उद्देष्य क्या हैं और इसका कार्यक्षेत्र कहाॅ तक है?


उत्तर:- संस्था के जन - जीव कल्याण एवं ‘स्वर्णिम भारत निर्माण’ हेतू 50 पंजीकृत उद्देष्य हैं जिनमें बेरोजगारी एवं अषिक्षा उन्मूलन कार्यक्रमों का संचालन प्राथमिक उद्देष्यों में हैं यद्यपि समयानुसार सभी उद्देष्यों की पूर्ति हेतू कार्यक्रम संचालित किये जाते रहेंगे। संस्था का कार्यक्षेत्र संपूर्ण भारतवर्ष है।


प्रश्न 4:- रोजगार का स्वरूप/विकल्प क्या है?


उत्तर:- परियोजना में पंजीकृत अंषदानदाताओं को किये गये सामाजिक उत्थान के कार्यों के फलस्वरूप अनुदान प्रदान करने की योजना तैयार की गई है। इस अनुदान की न्यूनतम सीमा रू. 5रू/- से प्रारंभ होकर वर्तमान योजना के अनुसार कुल 10 लाख रू. प्रति व्यक्ति संयुक्त अनुदान खाता है। अनुदान की गणना के लिए साॅफ्टवेयर वैबसाइट पर उपलब्ध है।


प्रश्न 5:- परियोजना में पंजीकरण कैसे होता है?


उत्तर:- परियोजना में पंजीकरण किसी भी आयु का कोई भी व्यक्ति करा सकता है। पंजीकरण के लिए निर्धारित शपथपत्र भर कर रू. 250/- की दान राषि के साथ अपने प्रेरक के माध्यम से अथवा स्वयं संस्था के मुख्य कार्यालय, नज़दीकी पंजीकृत शाखा कार्यालय, पंजीकृत समन्वयक के पास जमा करें और शपथ पत्र जमा करते समय पावती अवष्य लेलें। इस प्रकार मुख्य कार्यालय में फाॅर्म जमा होने पर दान दाता को ‘‘षुभाकंाक्षा’’ परियोजना में एक स्थाई अनुदान खाता क्रमंाक प्रदान किया जाता है। अगर किसी दानदाता को शपथ पत्र जमा करने वाले माह को छोड़कर अगले 2 माह में उपहार वगैरह प्राप्त नहीं होते हैं तो उसे लिखित षिकायत अपनी पावती की फोटोकाॅपी के साथ संस्था में भेजनी चाहिए। इस समय के पश्चात् की गई षिकायत पर संस्था कोई जिम्मेदारी वहन नहीं करेगी।


प्रश्न 6:- परियोजना में पंजीकृत स्वयं सेवक को यद्यपि भविष्य में अनुदान के रूप में आय होने का प्रावधान है मगर तत्काल में क्या लाभ है?


उत्तर:- शुभाकंाक्षा में पंजीकृत स्वयंसेवक को तत्काल में कुछ उपहार प्रदान किये जाते है -


उपहार (1) उपहार के रूप में एक घरेलू उत्पाद (एक साड़ी 5 मी., अथवा 9 मी., पैंट शर्ट का कपड़ा, सफारी सूट का कपड़ा, कुर्ता पाजामा, धोती कुर्ता, आॅफिस बैग, कंबल, बेडषीट, चायपत्ती, बरतन सेट स्कूल बैग, आॅफिस बैग, स्कूल ड्रेस, काॅपी सेट आदि) जिसकी बाजार, कीमत लगभग रू. 200-250 होती है, भेंट किया जाता है जो आपको अपने पे्ररक/परियोजना समन्वयक से लेना है या अपनी नजदीकी शाखा कार्यालय पर सदस्यता प्रपत्र जमा करके शाखा कार्यालय से लिया जा सकता है।


अथवा उपहार (2) घरेलू उत्पाद के स्थान पर उपहार स्वरूप रू. एक लाख की दि ओरियण्टल इन्स्योरेंस कं. लि. द्वारा प्रदत्त नागरिक सुरक्षा (व्यक्तिगत) बीमा पाॅलिसी ली जा सकती है जिसमें रू. 20000.00 तक गंभीर चोट लगने पर हाॅस्पिटल में भर्ती होने पर चिकित्सा खर्च तथा दुर्घटना में मृत्यु पर रू. 80,000/- बीमा कंपनी के नियमानुसार देय होता है। इसके लिए ओरिजनल पुलिस रिपोर्ट एवं ओरिजनल मेडिकल बिल होना आवष्यक है। यह पालिषि केवल एक वर्ष के लिए होती है। इसका लाभ 18 वर्ष से 65 वर्ष तक के दानदाता सदस्य ही उठा सकते हैं। दुर्घटना होने पर 48 घंटे के अंदर अस्पताल में भर्ती होने के प्रमाण के साथ निर्धारित प्रपत्र पर मुख्य कार्यालय को लिखित सूचना दें।


अथवा उपहार (3) संस्था द्वारा संचालित बहुउद्देषीय मासिक समाचार-पत्र ‘स्वयम् सहारा’ भी स्वयंसेवक को उपहार स्वरूप दिया जाता है। यह पत्र एक वर्ष तक साधारण डाक द्वारा सदस्य के पते पर भेजा जाता है तथा जागरूक सदस्यों को इसमें पत्र की नीति अनुसार अषिक्षा और जन समस्याओं पर लेखन की छूट रहती है एवं पत्रकारिता और विज्ञापन के क्षेत्र में कार्य करने की वरियता प्रदान की जाती है।


अथवा उपहार (4) जो व्यक्ति परियोजना में स्वतंत्र प्रचारक का कार्य करना चाहते हैं वे दूसरे उपहार के रूप में प्रचारक पैकेज ले सकते हैं। इस पैकेज में एक स्वयं का फोटो लगा रंगीन फ्लैक्स बैनर, 1 सैट ‘सफलता के कुछ कदम’’ एवं अन्य सरक्यूलर्स/सदस्यता प्रपत्रादि होते हैं।


(विषेष:- उपरोक्त उत्पाद उपहार स्वरूप प्रदान किये जाते हैं तथा कभी बदलना या वापिस देने लेने का कोई प्रावधान नहीं है। कुछ प्रतिनिधि स्थानीय स्तर पर कुछ उपहार खरीद कर देते हैं, बिना लिखित अनुमति के ऐसा करना गैरकानूनी है। किसी प्रकार के उपहार का नमूना संस्था से प्रमाणित कराना आवष्यक है।)


प्रश्न 7:- उपहार में मिलने वाला बीमा कितने वर्ष के लिए होता है? क्या साधारण मृत्यु अथवा किसी बीमारी के इलाज के लिए भी बीमा कंपनी कुछ सहायता करती है?


उत्तर:- नषे में, आत्महत्या, हत्या, साधारण मृत्यु अथवा बीमारी के इलाज हेतू बीमाराषि नहीं मिलती कृपया प्रष्न 6 का उत्तर देखें।


प्रश्न 8:- अनुदान खाते से क्या तात्पर्य है?


उत्तर:- रू. 250/- के दानदाता स्वयंसेवकों को जो पंजीकरण क्रं. कम्प्यूटर द्वारा प्रदान किया जाता है उसे ही अनुदान खाते का नाम प्रदान किया गया है। इसी खाते के माध्यम से भविष्य की विभिन्न योजनाओं से धनराषि आयेगी और इसमें स्वयंसेवकों का संस्था से सभी प्रकार का लेनदेन दर्ज होगा।


प्रश्न 9:- परियोजना में स्वयंसेवक का पंजीकरण कब से मान्य होता है?


उत्तर:- जानकारी वैबसाइट पर प्रविष्ट होते ही पंजीकरण/अनुदान खाता जारी हो जाता है मगर 250/- पूर्ण दानराषि मिलने पर ही उपहार और अनुदान प्राप्त किये जा सकते हैं। स्थायी पंजीकरण का संदेश अलग से मोबाईल पर जाता है।


प्रश्न 10:- शपथ पत्र जमा होने के पश्चात् उपहार कैसे प्राप्त होता है?


उत्तर:- जो स्वयंसेवक आपका प्रेरक है वो ही आपको उपहार/बीमा सूची की छायाप्रतियाॅ आदि पहुॅचाने को प्रतिबंधित है। अगर आपको समयानुसार दानराषि देने के बाद भी उपहार आदि नहीं मिलते हैं तो मुख्य प्रषासनिक कार्यालय से अवष्य संपर्क कर लें ध्यान रखें की आपको संस्था के नाम से कोई व्यक्ति न ठगे।

प्रश्न 11:- अगर कोई पदाधिकारी अथवा स्वयंसेवक किसी नये व्यक्ति से दानराषि लेकर संस्था में जमा न कराये तो क्या होगा?


उत्तर:- इसके लिए नये व्यक्ति को शपथ पत्र की पावती अथवा प्रमाण के साथ मुख्य कार्यालय में लिखित षिकायत करनी होगी। संस्था ऐसे व्यक्ति के विरूद्ध धोखाधड़ी और ठगी का मामला बनाकर उचित कानूनी कार्यवाही करेगी तथा षिकायतकर्ता सदस्य को न्याय दिलवायेगी। ऐसे में संपूर्ण खर्चा भी उसी व्यक्ति से वसूल किया जायेगा। षिकायत केवल लिखित में मान्य होगी, जोकि तय समय सीमा पंजीकरण दिनंाक के 2 माह के अंतर्गत होनी चाहिए। 


प्रश्न 12:- अगर कोई पदाधिकारी संपूर्ण भारतवर्ष में दूर - दूर के क्षेत्रों में परियोजना के विस्तार हेतू व्यक्तियों का पंजीकरण कराना चाहता है तो उसके लिए क्या कार्यवाही करनी होगी?


उत्तर:- ऐसे व्यक्तियों को फोन द्वारा सूचित करके योजना का संक्षिप्त परिचय और वैबसाईट लिंक दें तथा ऐसे सभी व्यक्तियों के फोन नं. तथा पत्र - व्यवहार के पते कार्यालय में जमा करायें। प्रत्येक स्थान पर आपका समूह विकसित करने में संस्था का पूर्ण योगदान रहेगा।


प्रश्न 13:- अगर कोई स्वयंसेवक अपना पंजीकरण निरस्त कराना चाहे तो क्या करना होगा?


उत्तर:- जैसा कि सर्वविदित है दानराषि कभी वापिस देय नहीं होती है न ही वापिस माॅगनी चाहिए। अपना पंजीकरण कोई भी व्यक्ति लिखित सूचना देकर निरस्त करा सकता है मगर संस्था स्वयं किसी भी स्वयंसेवक की दानराषि कभी वापस नहीं देगी। निरस्त पंजिकरण किसी अन्य जरूरतमंद व्यक्तियों को स्थानंातरित किया जाता है तथा उससे दानराषि लेकर पहले व्यक्ति को प्रदान की जा सकती है, मगर इसके लिए कोई समय सीमा निष्चित नहीं है।


प्रश्न 14:- क्या कोई अनुदान खाता/पंजीकरण किसी दूसरे के नाम पर स्थानंातरित किया जा सकता है?


उत्तर:- जी हाॅ, किसी की मृत्यु होने पर लिखित आवेदन देकर नामंाकित व्यक्ति के नाम पर निषुल्क स्थानंातरित किया जा सकता है। मृत्यु न होने की दषा में कोई भी व्यक्ति अपना खाता किसी को भी रू. 50/- की दानराषि (स्थानंातरण शुल्क) देकर, लिखित आवेदन देकर स्थानंातरित करा सकता है। मगर नये स्वयंसेवक को अनुदान हेतू अपना स्वयं का समूह बनाना अनिवार्य है।


प्रश्न 15:- क्या संस्था द्वारा कुछ रोजगार परक कार्य जैसे मोमबत्ती उद्योग, अगरबत्ती उद्योग, पापड़ उद्योग, कढ़ाई - बुनाई, सिलाई केन्द्र, ब्यूटी पार्लर, स्कूल अथवा ट्यूषन सैन्टर, मोबाइल रिपेयरिंग, वाषिंग पाउडर निर्माण आदि का संचालन भी किया जाता है? इसमें भाग लेने की प्रक्रिया क्या है?


उत्तर:- संस्था के 50 पंजीकृत उद्देष्य हैं जिनमें उपरोक्त सभी कार्य भी आते हैं। संस्था के द्वारा इन कार्यों का संचालन जिला स्तरीय, तहसील स्तरीय, ब्लाॅक स्तरीय और स्वतंत्र रूप से कार्य करने वाली कम से कम 10 सदस्यों की उपसमितियों (स्वसहायता समूह) द्वारा किया जायेगा। उपसमिति के सदस्यों को संस्था का स्तर के अनुसार आजीवन सदस्यता की दानराषि जमा करनी होगी।


प्रश्न 16:- क्या कोई सरकारी कर्मचारी इस परियोजना का भागीदार बन सकता है?


उत्तर:- जी हाॅ! यह एक सामाजिक संस्था है। इसमें रू. 250/- दानस्वरूप दिया जाता है। अगर कोई स्वयंसेवक सामाजिक कार्याें में भागीदारी करता है तो उसे कोई वेतन नहीं मिलता बल्कि उसके द्वारा देषहित में किये गये व्यक्तिगत सहयोग के फलस्वरूप संस्था द्वारा एक निष्चित मानदेय/अनुदान राषि भेंट की जाती है तथा नियमानुसार व आवष्यकतानुसार इन राषियों पर टी.डी.एस. भी काटा जा सकता है। समाज सेवा के लिए किसी पर कोई प्रतिबंध नहीं होता है।


प्रश्न 17:- क्या कोई व्यक्ति एक से अधिक बार पंजीकरण करवा सकता है? क्या कोई व्यक्ति अपने घर के अन्य व्यक्तियों का भी पंजीकरण करा सकता है?


उत्तर:- कोई भी व्यक्ति रू. 250/- के गुणक के रूप में कितनी बार भी दानराषि दे सकता है। हर बार एक नया अनुदान खाता कम्प्यूटर द्वारा खोला जायेगा और पहले खातों से संबद्ध होता जायेगा। इस प्रकार सभी खातों की अनुदान राषि एक साथ जुड़ती जायेगी और अनुदान की मासिक अंतिम सीमा जोकि वर्तमान योजनाओं के अनुसार रू. 25000/- है, तक शीघ्र पहुॅचा जा सकेगा।


      कोई स्वयं सेवक या सामाजिक कार्यकत्र्ता, परियोजना समन्वयक किसी भी भारतीय नागरिक का पंजीकरण करा सकता है। फिर चाहे वो किसी भी उम्र का हो, उसका पारिवारिक सदस्य हो या अन्य हो।


प्रश्न 18:- क्या अध्यापकों द्वारा छात्र - छात्राओं को इस परियोजना का लाभ दिया जा सकता है?


उत्तर:- छात्रों को इस परियोजना में अवष्य जोड़ना चाहिए। इस तरह उनका बीमा, स्कूल बैग, काॅपी सैट, स्कूल ड्रेस आदि उपहार में मिलने पर दानराषि रू. 250/- का सदुपयोग होता है, देष सेवा की ओर रूझान बढ़ता है, एक सामाजिक कार्यकत्र्ता की मानसिकता का विकास होता है और भविष्य में प्रस्तावित अनुदान के रूप में होने वाली आय की दषा में रोजगार की चिंता से भी मुक्ति मिल सकती है। इसके साथ - साथ अध्यापकों की आय में भी वृद्धि होनी निष्चित है और देष में समग्र विकास कार्यों में गतिषीलता आनी भी निष्चित है।


प्रश्न 19:- दुर्घटना होने पर बीमा कंपनी द्वारा बीमित धनराषि मिलने में कितना समय लगता है?


उत्तर:- दुर्घटना की लिखित जानकारी बीमित व्यक्ति अथवा उसके नामंाकित व्यक्ति द्वारा दुर्घटना होने के 48 घंटे के अंदर संस्था के मुख्य कार्यालय या बीमा कंपनी में देनी होती है। इसके उपरांत बीमा कंपनी की औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं जिसमें 2 माह से 4 माह या कभी - कभी इससे अधिक का समय लग सकता है। दि ओरियंटल इन्स्यारेंस कंपनी लि. भारत सरकार का उपक्रम है। आप निष्चित रहें। नियमानुसार कार्य तय समय सीमा में ही होता है। दुर्घटना सूचना प्रपत्र मुख्य कार्यालय और परियोजना समन्वयकों के पास उपलब्ध है। प्रपत्र भरकर बीमा सूची और अस्पताल में भर्ती होने के प्रमाण के साथ ेींतउंेचदेच/हउंपसण्बवउ पर सूचित कर दें। समय पर सूचना न देने पर बीमा क्लेम पास करना बीमा कंपनी के नियमों पर आधारित है। इसमें संस्था की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। दुर्घटना बीमा में कम से कम 24 घंटे किसी मान्यता प्राप्त अस्पताल में भर्ती होना आवष्यक है।


प्रश्न 20:- क्या किसी सदस्य की मृत्योपरंात सदस्यता समाप्त हो जाती है?


उत्तर:- नहीं! मृत्योपरंात स्वयंसेवक की सदस्यता को उसके नामंाकित व्यक्ति को स्थानंातरित किया जाता है। इसके लिए लिखित आवेदन दिया जाता है।


प्रश्न 21:- स्वयं सेवक और सामाजिक कार्यकत्र्ता/परियोजना समन्वयक में क्या अंतर है?


 


 उत्तर:- सर्वप्रथम परियोजना में स्वयं सेवक के लिए पंजीकरण होता है। जो रू. 250/- की दानराषि के साथ साधारण शपथ पत्र के द्वारा होता है।


      इस पंजीकरण के पश्चात् कम से कम 5 लोगों के पंजीकरण कराने पर ही स्वयं सेवक कहा जाता है।


      जिन स्वयं सेवकों के व्यक्तिगत समूह में कम से कम 6 स्वयं सेवक होंगें वो सामाजिक कार्यकत्र्ता कहलाता है। ये 6 व्यक्ति उनके समूह में कम्प्यूटर द्वारा निर्धारित किये जाते हैं।


      एक सामाजिक कार्यकत्र्ता ही परियोजना समन्वयक के प्रषिक्षण के लिए वैद्य होता है।


      कम्प्यूटर में स्वयं सेवक के नाम पर भूरे रंग (इतवूद) और सामाजिक कार्यकत्र्ता के लिए हरे रंग (हतममद) से संकेत आता है।


प्रश्न 22:- क्या स्वयंसेवक/सामाजिक कार्यकत्र्ता के लिए निर्धारित समूह तैयार करने की कोई समय सीमा है? अगर कोई व्यक्ति अपना पंजीकरण कराके अपने समूह में किसी को भी नहीं जोड़ता तो क्या उसका अनुदान खाता बंद हो जायेगा?


उत्तर:- ये बेरोजगारी समापन के साथ ‘स्वर्णिम भारत निर्माण’ की परिकल्पना पर आधारित परियोजना है। मगर किसी के लिए कोई प्रतिबंध नहीं हैं इसमें कार्य करने का। अनुदान खाता केवल तब ही बंद हो सकता है जब कोई व्यक्ति संस्था के नियम विरूद्ध या अहित में कोई कृत्य करेगा। किसी को जोड़ने या न जोड़ने से खाता बंद नहीं होगा।


      अनुदान खाते में विभिन्न स्रोतों से धनराषि का आबंटन होता है। जिसमें स्वतः प्रसार योजना, व्यक्तिगत समूह प्रसार योजना, व्यक्तिगत और सरकारी दान/अनुदान राषियां एवं संस्था की व्यापारिक गतिविधियों का लाभांश मुख्य रूप से है।


      इस प्रकार व्यक्तिगत समूह निर्मित न करने पर भी अनुदान खातों में राषि आनी सुनिश्चित है जोकि कम्प्यूटर द्वारा एक निर्धारित प्रक्रिया के अनूरूप होगी। इस प्रक्रिया के द्वारा सदैव हेतू है राषि का खातों में आना निरन्तर जारी रहेगा।


      तात्पर्य है कि अनुदान खाते में राषि आने के लिए किसी भी प्रकार की कोई शर्त नहीं है।


प्रश्न 23:- अनुदान खाते में आयी हुई राषि का आहरण कब कैसे और कितना होता है?


उत्तर:- स्पष्ट किया जाता है कि अनुदान खाते में आने वाली राषि की अन्तिम सीमा रू. 10 लाख तय है और ये निरन्तर एक प्रक्रिया के अन्तर्गत पूर्ण होने तक आती रहेगी। यद्यपि अनुदान प्राप्त करने की सीमा अवष्य है। इसमें 2 वर्ग के लोग हैं।


एक स्वयं सेवक एक माह में अधिकतम रू. 10,000/- तक का अनुदान प्राप्त कर सकता है। आहरण की शर्त है कि उसकी स्वयंसेवक की प्रविष्टि पर भूरे रंग का चिन्ह हो। अनुदान खाते में  पर्याप्त राषि हो और ये केवल स्वतः प्रसार योजना एवम् सरकारी दान/संस्था की व्यापारिक गतिविधियों से प्राप्त अनुदान से आयी राषि हो।

व्यक्तिगत समूह से कम्प्यूटर प्रक्रिया के तहत आयी राषि स्वयंसेवक नहीं प्राप्त कर सकता है।  


एक सामाजिक कार्यकत्र्ता एक माह में अधिकतम रू. 25000/- की अनुदान राषि प्राप्त कर सकता है। आहरण की शर्त है कि उसकी स्वयंसेवक की प्रविष्टि पर हरे रंग का चिन्ह अंकित हो और अनुदान खाते में पर्याप्त राषि उपलब्ध हो।

सभी सामाजिक कार्यकत्र्ता ‘स्वयंसेवक’ के अनुदान खाते में आने वाली सभी प्रकार की योजनाओं की राषि निकालने का अधिकारी होता है।


अर्थात  एक स्वयं सेवक की मासिक अनुदान सीमा रू. 10,000/- है।


      एक सामाजिक कार्यकत्र्ता की मासिक अनुदान सीमा रू. 25000/- हैं।


प्रश्न 24:- अगर अनुदान खाते में विभिन्न योजनाओं से राषि आ जाती है और कम्प्यूटर में उचित चिन्ह ‘भूरा या हरा’ नहीं होता है तो अनुदान कैसे मिलेगा?


उत्तर:- अनुदान खाते में राषि निरन्तर अपनी प्रक्रिया से आती रहेगी लेकिन जब तक स्वयं सेवक की औपचारिकता पूरी नहीं करेंगे तो किसी भी प्रकार की अनुदान राषि का आहरण नहीं किया जा सकता है। नियमानुसार खाते में किसी भी प्रकार की योजना के अन्तर्गत रू. 500/- होने तक उस योजना में निर्धारित लक्ष्य पूरा करना अनिवार्य है। अगर लक्ष्य पूरा नहीं किया जायेगा तो रू. 500/- से ऊपर की राषि आती तो रहेगी मगर निरस्त होती रहेगी।


      अतः सामाजिक कार्यकत्र्ता के अनुदान खाते में किसी भी योजना में रू. 500/- की अनुदान राषि आने तक उसके लिए निर्धारित लक्ष्य पूरा होना आवष्यक है। ऐसा ना होने पर अनुदान खाता निरस्त नहीं होगा बल्कि जब भी लक्ष्य पूरा करेंगे तो प्रथम बार अधिकतम रू. 500/- ही आहरित हो सकेगा बाकि राषि निरस्त होती रहेगी।


प्रश्न 25:- कैसे पता चलेगा कि अनुदान खाते में कितनी अनुदान राषि आ चुकी है?


उत्तर:- यह कार्य प्रषिक्षित सामाजिक कार्यकत्र्ताओं और प्रेरक प्रतिनिधियों का है कि वे अपने समूह की जानकारी रखें और उन्हें बतायें। लोगों को स्वयं भी जानकारी लेते रहना चाहिए। सभी की प्रविष्टि वैबसाइट पर है और कहीं पर भी देखी जा सकती है।


      इसके अतिरिक्त कम्प्यूटर द्वारा स्वंयमेव मोबाइल पर संदेष और ईमेल से भी जानकारी दिये जाने का प्रावधान हैं। इसके लिए अपने मोबाईल नं. और ईमेल वगैरह आवष्यक रूप से अपडेट करते रहना चाहिए।


प्रश्न 26:- अगर कोई व्यक्ति जानते हुए भी अपनी शर्तें पूरा नहीं करता और अनुदान राषि नहीं लेता तो क्या उनका अनुदान खाता निरस्त हो जायेगा?


उत्तर:- इस दषा में वह खाता किसी दूसरे जरूरतमंद व्यक्ति को स्थानान्तरित किया जा सकता है। इसकी सूचना वैबसाईट पर दी जायेगी और पे्ररक प्रतिनिधि की सलाह से ही वह खाता किसी को स्थानान्तरित होगा। इस पर अंतिम निर्णय परियोजना प्रभारी का ही मान्य होगा। हमारा उद्देष्य शत प्रतिषत लोगों को स्वयं सेवक/सामाजिक कार्यकत्र्ता बनाना और उन्हें अनुदान प्रदान करना है।


प्रश्न 27:- कितने दिनों में अनुदान मिलना शुरू होता है और कितना मिलता है?


उत्तर:- इसके लिए दिन निष्चित नहीं हैं और ना ही किया जा सकता। अनुदान स्वयं सेवकों के अपने काम पर और सरकारी अनुदान पर एवं संस्था द्वारा संचालित विभिन्न व्यापारिक विभिन्न गतिविधियों के लाभंाष पर निर्भर है। ऊपर बताया गया है कि प्रत्येक योजना की एक मासिक अन्तिम सीमा है और ये रू. 10 लाख पूर्ण होने तक के लिए है। अतः सभी पंजीकरण कराने वाले व्यक्तियों को सर्वप्रथम स्वयं सेवक बनने हेतू निर्धारित लक्ष्य पूरा करना चाहिए। ऐसा अगर सभी लोग करेगें तो ही योजना तीव्र गति से सफल होगी।


प्रश्न 28:- अगर कोई व्यक्ति सही प्रक्रिया के अन्तर्गत सभी योजनाओं में निर्धारित लक्ष्य पूरा करता है तो उसे अनुदान राषि कब से मिलनी शुरू होगी?


उत्तर:- कम्प्यूटर में साॅफ्टवेयर इस प्रकार बनाया गया है कि प्रत्येक स्वयंसेवक के और प्रत्येक सामाजिक कार्यकत्र्ता के दो-दो समूह स्थापित होंगे। स्वयंसेवक को संस्था द्वारा दिये गये व्यक्तियों का समूह इसे संस्थागत/स्वतः प्रसार समूह कहते हैं और स्वयं सेवक का स्वयं का समूह इसे व्यक्तिगत समूह कहते हैं।


      प्रत्येक समूह में कंप्यूटर प्रक्रिया द्वारा लोग आते हैं।


      इन समूह के साथ कार्य करके ही सामाजिक कार्यकत्र्ता बना जायेगा जैसा कि सब जानते हैं कि जितनी बड़ी आपकी टीम होगी उतने बड़े ही आप सामाजिक कार्यकत्र्ता कहलाओगे।


      ये समूह एक निर्धारित फाॅरमेट में कम्प्यूटर में ऐन्ट्री होता है। जैसे ही किसी सामाजिक कार्यकत्र्ता के व्यक्तिगत समूह में 40 स्वयंसेवक पूरे होते हैं, 41 वाॅ स्वयंसेवक तैयार होते ही उसका अनुदान खाता धनात्मक हो जाता है और फिर प्रत्येक नये स्वयंसेवक के आने से अनुदान खाते में बढ़ोत्तरी होती रहती है। प्रत्येक व्यक्ति को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कदम दर कदम रू. 10 लाख का अनुदान मिलना अवष्यंभावी है, बषर्ते कि योजना के नियमों का पालन होता रहे।


      इसके लिए परिश्रम करें तो जल्दी आयेगा वरना समयानुसार आयेगा। मगर आयेगा अवष्य।


      ये योजना स्वयं सिद्ध है। अतः अगर आप वास्तव में आर्थिक उत्थान चाहते हैं तो देष सेवा में संलग्न होना ही होगा। अतः पंजीकरण कराने के पश्चात् सामाजिक कार्यकत्र्ता तक का लक्ष्य पूरा करने हेतू कार्य करें और अपने आर्थिक उत्थान के साथ देष सेवा में संलग्न ही मान, सम्मान प्राप्त करें और व्यक्तिगत समूह में 40 स्वयंसेवक कार्यकत्र्ताओं की टीम का शीघ्रातिषीघ्र गठन करें।


 


प्रश्न 29:- अगर कोई व्यक्ति अपना व्यक्तिगत समूह नहीं बनाता, किसी को भी अपने समूह में नहीं जोड़ता तो फिर उसका व्यक्तिगत समूह कैसे बनेगा? अगर नहीं बना तो फिर अनुदान कैसे मिलेगा? खाते में कहाॅ से आयेगा?


उत्तर:- कम्प्यूटर फारमेट इस प्रकार बनाया गया है कि आपका व्यक्तिगत समूह और स्वयंसेवकों की टीम तो बनेगी ही, इसमें कोई शक नहीं हाॅ बस उस समूह का अनुदान के रूप में अगर लाभ लेना है तो प्रत्येक स्वयं सेवक को अपना लक्ष्य पूरा करना ही होगा।


      व्यक्तिगत समूह का लक्ष्य अगर पूरा नहीं किया जाता है तो केवल संस्थागत समूह के माध्यम से आई अनुदान खाते में राषि ही आहरित की जा सकेगी। अगर आपके व्यक्तिगत समूह में एक भी व्यक्ति नहीं है तो केवल संस्थागत समूह से ही राषि आयेगी।


      इस समूह में भी निर्धारित स्वयं सेवक आपके समूह में स्वतः भी आयेंगे और अनुदान खाते में नियमानुसार शत प्रतिषत अनुदान के पैसे भी आयेंगे और जैसे ही एक निष्चित प्रक्रिया के अन्तर्गत 200 स्वयं सेवक आपके संस्थागत समूह में आते हैं इसके बाद अनुदान राषि का आहरण किया जा सकता है।


      ध्यान रहे कि इस राषि का आहरण करने के लिए कम से कम 5 स्वयंसेवकों का पंजीकरण कराके निर्धारित समूह बनाना होगा। 200 लोगों के संस्थागत समूह में आने की कोई समय सीमा भी नहीं है क्योंकि ये संस्था में आने वाले नये स्वयंसेवकों की संख्या और गति पर निर्भर है।


      अतः इस प्रकार हम कह सकते हैं कि अगर जल्दी अनुदान चाहिए तो जल्दी अपने लक्ष्यों की पूर्ति करें। अगर केवल संस्थागत अनुदान पर ही निर्भर रहना है तो जितना जल्दी हो अपना 5 पंजीकरण कराने का लक्ष्यपूर्ण करें। कुछ भी नहीं करना चाहते हैं तो बस प्रतिक्षा कीजिए। खाता आपका खुल गया है अर्थात पेड़ का बीज जमीन में डाल दिया गया है। बीज को पेड़ बनने में और पेड़ पर फल आने में कितना समय लगेगा ये बताना सम्भव नहीं।


 


      हमारी गारन्टी तो यह है कि फल आयेंगे जरूर, समय आप लोगों के हाथ में है।


प्रश्न 30:- स्वयं सेवक के पंजीकरण हेतू रू. 250/- की दानराषि देनी होती है मगर जैसा की ऊपर बताया गया है परियोजना समन्वयक का पंजीकरण कैसे होता है? क्या इसके लिए भी कोई दानराषि का प्रावधान है? अगर है तो कितना है? इसमें क्या कोई उपहार मिलता है? क्या बिना किसी दानराषि के भी परियोजना समन्वयक का पंजीकरण हो सकता है? कृपया स्पष्ट करें।


उत्तर:- स्वयं सेवक से प्रोन्नत होकर सामाजिक कार्यकत्र्ता बनते हैं। सामाजिक कार्यकत्र्ता के पश्चात परियोजना समन्वयक का पंजीकरण किया जा सकता है। परियोजना समन्वयक एक निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए वरिष्ठ परियोजना समन्वयक बनते हैं तथा इसके बाद प्रेरक बनते हैं।


परियोजना समन्वयक भी 2 प्रकार के होते हैं, क्रियाषील एवं अक्रियाषील। स्वयंसेवक से परियोजना समन्वयक के प्रोन्नत प्रक्रिया में अनुदान खाते की अंतिम सीमा भी 10 लाख से बढ़ाकर 25 लाख की गई है तथा खाते में अनुदान आने के स्रोत भी बढ़ जाते हैं। इनकी प्रविष्टि 3 प्रकार से होती है -


1.         जब कोई स्वयं सेवक एक सामाजिक कार्यकत्र्ता का लक्ष्य पूरा करता है अर्थात् जब स्वयं सेवक की प्रविष्टि हरे रंग से चिन्हित होती है तो कम्प्यूटर व्यवस्था द्वारा स्वतः परियोजना समन्वयक का पंजीकरण होकर एक नई प्रविष्टि अलग पोरटल पर हो जाती है। ये प्रविष्टि कम्प्यूटर में ‘लाल’ रंग से प्रदर्षित होती है।


      कम्प्यूटर में ऐन्ट्री होने का लाभ ये होता है कि आगे आने वाले परियोजना समन्वयक से इस ऐन्ट्री का समूह विस्तार होना शुरू हो जाता है और योजनानुसार इसमें अनुदान राषि आनी प्रारम्भ हो जाती है। अर्थात स्वयं सेवक अधिकतम अनुदान की सीमा रू. 25 लाख श्रेणी में पंजिकृत हो जाता है। ये अक्रियाषील परियोजना समन्वयक कहलाते हैं।


2.          इसमें वे स्वयं सेवक होते है जो अपना पंजीकरण अधिकतम अनुदान सीमा में इसलिए कराना चाहते हैं ताकि उन्हें बाकी परियोजना समन्वयक के पंजीकरण और कार्यों का लाभ जन्दी मिलना प्रारम्भ हो जाये फिर चाहे उनके स्वयं के निर्धारित लक्ष्य पूरे हुए हों अथवा नहीं या फिर वो निष्चित आयु सीमा से कम हैं अथवा शारीरिक रूप से सक्षम नहीं हैं। ऐसे स्वयं सेवकों को रू. 2000/- संस्था में दानराषि देते हुए निर्धारित प्रपत्र भरकर जमा करना होता है। इस योजना में उनका पंजीकरण करके स्वयंसेवक के अनुदान खाते से सम्बद्ध कर दिया जाता है। यह भी अक्रियाषील परियोजना समन्वयकों में ही होते हैं।


      इस प्रकार पंजीकरण कराने पर परियोजना में चल रहे कोई भी 5 उपहार तथा उच्च वर्ग के पंजीकरण क्रमंाक वाला स्वागत पत्र दिया जाता है। ज्ञात रहे कि कोई भी परिचय - पत्र केवल उस पद तक पहुॅचने पर और निर्धारित शर्तें पूर्ण करने पर ही मिलेगा।


3.         परियोजना समन्वयक का यह वर्ग अतिमहत्वपूर्ण है। इसमें वो लोग आते हैं जो वास्तव में परियोजना में तीव्रता से कार्य करना चाहते हैं और मानदेय राषियंा, अनुदान प्राप्त करना चाहते हैं एवम् सामाजिक गतिविधियों में शामिल होकर उच्च पदाधिकारों तक पहुॅचना चाहते हैं।


वास्तव में मानदेय राषि इसी पद पर आये लागों के लिए अधिकृत हैं और वास्तव में ये लोग ही समूह विस्तार करने और सभी सामाजिक गतिविधियों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और आम आदमी तक परियोजना का प्रचार - प्रसार करते हैं। ये लोग क्रियाषील परियोजना समन्वयक कहलाते हैं।


      इसमें पंजीकरण के लिए रू. 2000/- की दानराषि की आवष्यकता होती है। इसमें 18 वर्ष या इससे अधिक के लोगों का पंजीकरण किया जाता है। पहचान पत्र, फोटो, चरित्र - प्रमाण पत्र और आयु प्रमाण के साथ निर्धारित प्रपत्र भर कर रू. 2000/- की दानराषि देने पर इस वर्ग में पंजीकरण होता है।   


      इस दानराषि का उपयोग परियोजना समन्वयक को एक बैनर, नियुक्ति पत्र, परिचय - पत्र, प्रेस कार्ड (आवष्यकतानुसार) एक फाईल के साथ प्रषिक्षण में किया जाता है। प्रषिक्षणोपरान्त लिखित परीक्षा में उत्र्तीण होने पर प्रमाण - पत्र भी प्रदान किया जाता है।


      ये लोग ही समूह विकसित करने एवम् मानदेय राषि पाने के लिए अधिकृत होते हैं एवम् इनके लिए एक निर्धारित कोड प्रदान किया जाता है।


प्रश्न 31:- कम्प्यूटर द्वारा स्वतः व्यवस्था में परियोजना समन्वयक की ऐन्ट्री कर रू. 2000/- कैसे जमा होता है? जो लोग वर्ग 2 के हिसाब से प्रविष्टि लेते है मगर बाद में प्रषिक्षण लेना चाहें तो क्या करना होगा? अगर कोई व्यक्ति एक बार में रू. 2000/- दानराषि नहीं दे सकता तो उसके लिए क्या प्रावधान है?


उत्तर:- कम्प्यूटर में जो अनुदान गणना होती है, उसके लिए स्वयं सेवक के लिए रू. 250/- तथा प्रेरक प्रतिनिधि के लिए रू. 2000/- के अनुसार ही योजना का सूत्र एवम् साॅफ्टवेयर तैयार किया गया है।


      स्वतः परियोजना समन्वयक के पंजीकरण के लिए कम्प्यूटर स्वतः ही पहले पंजीकरण की दानराषि काटेगा और इसके बाद बाकी अनुदान या प्रक्रिया होगी। जैसा कि हम पहले ही कह चुके हैं ये गरीबोंत्थान परियोजना है अतः जो बिल्कुल भी सक्षम नहीं है, इस योजना में पंजीकरण होने पर बेषक कुछ अधिक समय लगेगा मगर वो लोग भी एक ना एक दिन मुख्य धारा में आ जायेंगे।


      इसमें कम्प्यूटर द्वारा संचालित योजनाओं से दानराषि तो पूरी हो जायेगी मगर किसी प्रकार का उपहार या परिचय - पत्र प्रदान नहीं होंगे अपितू पंजीकरण का स्वागत पत्र निष्चित प्रक्रिया से अवष्य प्रदान किया जायेगा या फिर दानराषि स्वयं जमा करके किसी भी वर्ग में आ सकते हैं।


      दूसरा जो लोग वर्ग 1 या 3 में हैं और बाद में प्रषिक्षण लेना चाहेंगे और वर्ग 3 में क्रियाषील परियोजना समन्वयक बनना चाहेंगे तो उन्हें आवेदन देकर प्रमाण - पत्रों सहित प्रषिक्षण हेतू आवष्यक शुल्क देना होगा। ये शुल्क भी दानराषि के रूप में ही होगा और स्थान एवम् प्रषिक्षणार्थियों की संख्या पर निर्भर होगा। जिसकी सूचना अलग से प्रदान कर दी जायेगी।


      जो लोग क्रियाषील परियोजना समन्वयक बनकर कार्य करने के इच्छुक हैं और उनके पास दानराषि नहीं हैं तो सामाजिक कार्यकत्र्ता की औपचारिकताएंॅ और निर्धारित लक्ष्य पूरा करने पर स्वतः पंजीकरण की प्रक्रिया का लाभ उठा सकते हैं।


      इसके बाद प्रषिक्षण के लिए लिखित आवेदन देकर और अनुमति लेकर परियोजना समन्वयक का काम कर सकते हैं तथा मानदेय के रूप में मिली राषि से भी परियोजना समन्वयक की औपचारिकताएं पूर्ण कर सकते हैं। उन्हें परियोजना समन्वयक का परिचय पत्र उपलब्ध करा दिया जायेगा। फिर अधिकतम 2 माह में अपनी निर्धारित दानराषि देकर नियुक्ति पत्र तथा बाकी औपचारिकताएं पूर्ण करा सकते हैं।


      परियोजना समन्वयक का पंजीकरण अगर शीघ्र कराना चाहते हैं और पर्याप्त दानराषि का प्रबन्ध नहीं हैं तो मात्र निर्धारित प्रषिक्षण शुल्क की दानराषि देकर भी करा सकते हैं मगर फाइल, उपहार और दूसरी औपचारिकताएं दानराषि पूरी करने पर ही प्रदान की जायेगी। यद्यपि प्रषिक्षण में सफल होने पर परिचय पत्र और प्रमाण पत्र प्रदान कर दिया जायेगा ताकि व्यक्ति क्षेत्र भ्रमण कर अपना काम कर सके।


      ज्ञात रहे कि ये छूट केवल इसलिए है कि हम गरीबोत्थान योजना पर काम कर रहे हैं। इसमें आने वाली दानराषि उपहार मानदेय और अनुदान के रूप में कार्यकत्र्ताओं को ही प्रदान की जाती है ताकि वे लोग सक्रिय होकर कार्य कर सके।


प्रश्न 32:- ये तो एक प्रकार का व्यापार हो गया, इसमें देष विकास कहाॅ है? इसे सामाजिक संस्था नहीं बल्कि मार्केटिंग कम्पनी क्यों ना कहा जाये?


उत्तर:- कम्पनी का मालिक कोई एक या कुछ व्यक्ति होते हैं। मार्केटिंग करने पर जो लाभ होता है वह उन कुछ व्यक्तियों का ही होता है। वो लोग सरकार को कुछ प्रतिषत् नियमानुसार टैक्स अवष्य देते हैं इसमें भी चोरी होने की गंजाइष रहती है मगर फिर भी एक बड़े हिस्से के मालिक वे लोग ही होते हैं।  


अगर मैं किसी को कहूॅ कि जाओ पूरे गाॅव में 100 पेड़ लगवा दो, सामाजिक कुरितीयों के विरूद्ध जन जागरूकता रैलीयां कर दो, अपनी गली की गंदगी साफ कर दो, अपने घर में शौचालय बनवा दो या ऐसे ही कुछ दूसरे काम जो आमतौर पर समाज सेवा के क्षेत्र में आते हैं, तो वो सीधा बोलेगा कि कर तो दूॅगा मगर उसे क्या लाभ होगा, इसमें खर्च होने वाला पैसा कहाॅ से आयेगा? क्योंकि एक आम आदमी ही समाज सेवा कर सकता है मगर उसे सर्वप्रथम अपनी रोजी रोटी की चिन्ता रहती है। इस पर ना कोई सरकार गौर करती है ना ही समाज सेवी संस्थाएं कर पाती है। इसलिए मैनें समाज सेवी न बनाकर मानदेय/अनुदान आधारित सामाजिक कार्यकत्र्ताओं की सोच पर काम किया है। लोग समाजोत्थान के कार्य करेंगें तो उन्हें पैसे का विकल्प भी चाहिए।


      मैं चाहता हूॅ कि भारत देष का प्रत्येक नागरिक समाज सेवा करें मगर उसे उसके अनुसार कुछ आर्थिक सहायता भी मिलती रहे ताकि वह सामाजिक कार्यों में निरन्तरता बनाये रखें।


      सभी सामाजिक संस्थाएं व्यक्तिगत लोगों द्वारा प्रदान किए पैसे से या फिर सरकार के दान/अनुदान पर चलती है। ये मुझे भी पता है मगर ये चंदे/दान/अनुदान लेने में जो समस्याएं आड़े आती है मुझे उनका एहसास भी है और अनुभव भी हो चुका है। इसलिए मैनें इन्सानियत के लिए/अपने देष के लिए/ अपने देषवासियों के लिए एक नया सूत्र खोजा है। इसमें सरकारी सहायता तो मिलेगी जब मिलेगी मगर देषहित को सर्वोपरि मानने वाले सक्षम लोग और स्वयं जरूरतमंद लोगों से मिली दानराषि से इसका संचालन किया जाता है।


      इस माॅडल पर कार्य किया जाए तो शत प्रतिषत गारन्टी है ना बेरोजगारी रहेगी, ना ही कोई सामाजिक समस्या।


      मार्केटिंग कम्पनी कुछ बेचती है मगर हम लोग नहीं बेच रहे है। केवल उपहार भेंट करते हैं और हाफ खरीदते हैं तो पक्के बिल पर जिस पर नियमानुसार सरकार को टैक्स भी जाता है। ये बेचने वाला बतायेगा।


      लोग जिन्हें अपनी समस्याओं से छुटकारा पाना है, जो भारतवासी है और भारतदेष को प्यार करते हैं हमसे कुछ खरीदते नहीं है बल्कि संस्था में दान करते हैं और बदले में हम उन्हें सदस्य नहीं बनाते देष हित में कार्य करने के लिए स्वयं सेवक बनाते है। हाॅ अगर कुछ संस्था में पैसा बचता है तो उसी से हम देष हित के कार्यक्रम करते हैं और स्वयंसेवकों के लिए रोजगार (अनुदान) का विकल्प तैयार करते हैं। इस प्रकार हम बेरोजगारी जैसी मूलभूत समस्या का हल सामाजिक कार्यों में करते हुए राष्ट्रसेवा ही कर रहे हैं।


      दो विकल्प हैं, हम सरकारी अनुदान के लिए चक्कर काटें मिलने वाले अनुदान का बंदरबाॅट करदें या फिर स्वयं जरूरतमंद और उदार हृदयी व्यक्तियों से मिलकर, दानराषि लेकर अपना काम शुरूकर दें। हमने दूसरा विकल्प चुना क्योंकि इसमें ही हम सब का हित है। ये ही देष हित में है।


प्रश्न 33:- इस परियोजना से बेरोजगारी, गरीबी कैसे समाप्त होगी और देष का समग्र विकास करके ‘स्वर्णिम भारत निर्माण’ की परिकल्पना कैसे साकार होगी?


उत्तर:- सबसे पहले हमें ऐसे लोग चाहिए जो देष सेवा, सामाजिक कार्यों के प्रति समर्पित हो मगर पुरानी कहावत है, ‘‘भूखे भजन न होय गोपाला, यह लो अपनी कंठी माला’’, अर्थात भूखे पेट कोई भी कुछ नही कर सकता।


हमने ऐसा माडल तैयार किया है जिसमें देष के सभी बेरोजगारों और देष सेवा में रूची रखने वाले तथा उनके अनुदान खाते खोले जायेंगे। उन खातों में अनुदान राषि आयेगी और निन्तर कई योजनाओं में माध्यम से आती रहेगी। मगर ये अनुदान राषि उन्हें तभी मिलेगी जब वो निर्धारित नियमों के अनुसार देष के समग्र विकास कार्याें में वास्तविक हिस्सेदारी करते रहेंगे।


और जब व्यक्ति को पैसा मिलेगा तो वह क्यों नहीं वृक्षारोपण करेगा, क्यों नहीं बच्चों को षिक्षा देगा, क्यों नहीं जनजागरूकता के कार्यक्रमों में हिस्सा लेगा। क्यांे दहेज मांगेगा, क्यों बेटी को मारेगा, क्यों नषा करेगा, क्यों चोरी, डकैती या जुआ जैसी भंयकर लतों में पड़ेगा और क्यों आतंकवादी बनेगा? सभी समस्याओं की मूल पैसा है, बेरोजगारी है ये समस्या समाप्त हो जाये तो कैसे नहीं होगा? ‘स्वर्णिम भारत निर्माण’ ये कहने से नहीं होगा, करने से होगा। हमारे माॅडल में लोग विवष हो जायेंगे देष हित में कार्य करने को क्योंकि हमने उनके लिए ‘सोने के अंडे’ देने वाली मुर्गी तैयार करदी है। कोई इतना बेवकूफ नहीं होता कि ‘भरी खीर की थाली’ में लात मारकर अपना अहित करेगा और जब सभी व्यक्ति अपना हित समझेंगे तो यही ‘स्वर्णिम भारत निर्माण’ होगा।


प्रश्न 34:- ठीक है, लोग सामाजिक कार्य करेंगे तो उन्हें बदले में अनुदान के रूप में पैसा मिलेगा मगर ये पैसा तो कम्प्यूटर प्रोग्राम के माध्यम से मिलेगा और लोगों को पंजीकरण कराके स्वयंसेवक बनना होगा फिर धीरे - धीेरे उनके खाते में पैसा आयेगा तो वे लोग काम करेंगे। मगर समस्या ये है कि खुद के पंजीकरण हेतू एक गरीब आदमी को रू. 250/- दानराषि देनी होगी ये तो उसकी जेब से चला ही गया ना, कैसे कहा जाता है कि पंजीकरण निषुल्क है? और फिर उसे 5 लोगों के पंजीकरण भी कराने आवष्यक है, अपनी रोजी छोड़कर कैसे कोई किसी के पास जायेगा?


उत्तर:- जब भी किसी का पंजीकरण होता है तो एक उपहार प्रदान किया जाता है जिसका विस्तृत विवरण प्र.6 में दिया गया है और वह उपहार दानदाता के उपयोग की वस्तु ही होती है, जिसका बाजार भाव भी लगभग दी गई दानराषि के बराबर ही होता है।  


      दुनिया में सभी लोग कुछ ना कुछ तरीके से पैसा कमाते हैं और फिर उसे कहीं ना कहीं खर्च करते हैं अपनी आवष्यकताओं की पूर्ति के लिए, क्या इसके अतिरिक्त भी कोई कुछ करता है? जी नहीं। अगर किसी व्यक्ति को एक पैंटषर्ट का कपड़ा खरीदना है, कोई साड़ी खरीदनी है, चायपत्ती लेनी है, बीमा कराना है तो वो ये सब करेगा ही। जीवन भर ये ही करते आये है और करते रहेंगे।


      अगर कोई व्यक्ति कुछ रूपयों की लागत लगा कर एक दुकान खोल लें या कोई उत्पादन शुरू करें तो उसके पास जो भी ग्राहक आयेंगे उनका काम केवल ये होगा कि मेहनत मजदूरी करके कमाओं और उस के पास दे आओ, बदले में अपने मतलब की वस्तु ले आओ ऐसा वे ग्राहक जीवन भर करते रहेंगे तो क्या इस लेन देन से ग्राहक को कोई आर्थिक लाभ है? नहीं, केवल एक व्यक्ति को ही वह पहले भी उन लोगों से अमीर और धीरे-धीरे वे सब ग्राहक मिलकर उस एक व्यक्ति को लखपति और फिर करोड़पति और फिर पूंजीपति बना देते हैं।


      ये ही इस दुनिया में आदिकाल से होता रहा है। धनवान हमेषा अधिक धनवान रहा है और गरीब जहाॅ था वहीं है और अगर ये ही ढर्रा चलेगा तो कभी ऊपर नहीं उठ सकता।


      हमने अपने गरीबोत्थान माॅडल में इसी विषय पर कार्य किया/एक आम आदमी इस बात को नहीं जानता कि कोई भी वस्तु बाजार में जिस भाव पर मिलती है वो उसकी लागत से दोगुना, ढाई गुना, तीन गुना तक होती है। अर्थात जिस वस्तु की थोक मूल्य सौ, सवा सौ होगी वो बाजार में दो सौ ढाई सौ से कम कदापि नहीं होगी।


      तात्पर्य है कि अगर संस्था में कोई दानदाता रू. 250/- का दान करता है तो उसे लगभग उतनी ही कीमत का कोई जरूरी सामान मिल जाता है या कोई सेवा मिल जाती है बेषक ये उपहार में ही मिलेगा हाॅ अगर उपहार खरीदने में कुछ धनराषि संस्था को बचती है तो वह किसी एक व्यक्ति को धनवान नहीं बना रही अपितू बहुत से बेरोजगार और जरूरतमंदों में मानदेय के रूप में वितरित होती है जिनके माध्यम से सामाजिक कार्य संचालित किये जाते हैं।


      इस प्रकार हम कह सकते हैं कि ‘आम के आम, गुठलियों के दाम’। जो दानराषि प्रदान की उतनी राषि का वो सामान मिल गया जो कहीं न कहीं से आपको लेना ही था मगर साथ में आपका ‘पंजीकरण’ निषुल्क एक ऐसी योजना में स्थायी रूप से कर लिया गया जिससे कालान्तर में आपका बेरोजगारी उन्मूलन, गरीबोत्थान और हमारे प्रिय देष भारत का ‘समग्र विकास’ अवष्यंभावी है।


      आपका पंजीकरण एक स्वयं सेवक के रूप में किया गया है आपकों सामाजिक कार्यकत्र्ता बनाने के उद्देष्य से किया गया है। आपकी सभी समस्याओं का निदान केवल और केवल स्वयं का समूह निर्मित करना ही है अर्थात आपको आज नही ंतो कल अपना कम से कम 5 लोगों का समूह बनाना ही होगा तभी आप पूर्ण स्वयंसेवक या सामाजिक कार्यकत्र्ता बन सकेंगे। क्या आप अपना जीवन स्तर सुधारने और देष विकास के लिए इतना भी काम नहीं कर सकते?


      कुछ लोग कहते हैं कि छोड़ों यार, कुछ नहीं मिलेगा आगे, सब खा-पीकर भाग जायेंगे तो उन्हें हम ये कहना चाहते हैं कि ना भी मिलेगा तो उनका नुकसान तो कुछ नहीं हो रहा है। हम एक अच्छा उद्देष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं, अपने देष को दुनिया में सर्वोत्तम करना चाहते हैं, लोगों की सभी समस्याओं को हल करना चाहते हैं, मान लो 99 प्रतिषत हम कुछ नहीं कर पाये तो किसी का कुछ बिगड़ेगा नही ंना ही किसी का आर्थिक नुकसान होगा और हाॅ यदि 1 प्रतिषत हम कामयाब हो गये और आपका पंजीकरण नहीं हुआ होगा तो फिर सिवाय पछतावे के कुछ नहीं बचेगा और गत 12 वर्षों के कठिन परिश्रम के पश्चात् हमने सफलता प्राप्त करली है, इसकी हमें खुषी है और सभी कार्यकत्र्ता बधाई के पात्र भी हैं।


      अतः मैं अपील करता हूॅ कि स्वयं का पंजीकरण अवष्य करायें और अन्य लोगों को सलाह भी अवष्य दें। सबसे बड़ा सामाजिक कार्य तो ये ही होगा।


अब बात आती है कि रोजी रोटी छोड़कर कहाॅ लोगों के पास घूमेंगे तो इसका प्रबन्ध हमने पहले ही किया है।


      स्वयंसेवक बनने के लिए 5 लोगों को जोड़ना और अपना स्वयं सहायता समूह बनाना तो प्रत्येक व्यक्ति का कत्र्तव्य है। हाॅ इससे आगे आप जो भी करेंगे उन सबके लिए नकद मानदेय मिलता है और अनुदान भी नियमानुसार मिलता है। ना भी किसी के पास जाते हैं तो 1-2 वर्षों में 5-7 बार तो सभी लोग कुछ ना कुछ बाजार से लाते हैं अतः जो भी सामान संस्था में उपहार में उपलब्ध हो और वो आपके मतलब का हो, हर बार एक शपथ - पत्र भरो और ले लो 250/- दान देकर नया उपहार! इस प्रकार भी स्वयंसेवक की खानापूर्ति हो सकती है।


      मान लीजिए आज आपका पंजीकरण हुआ आपने उपहार में अपना बीमा करा लिया, कुछ दिन बाद आपके बच्चे को स्कूल बैग चाहिए, माता जी को साड़ी चाहिए, पिताजी को धोती कुत्र्ता चाहिए, बहिन को सूट सलवार चाहिए तो आप क्या करेंगे? या तो बाजार जाकर खरीद कर ले आओ या फिर संस्था में उन सबके शपथ पत्र जमाकर उपहार में ले लें। आपको तो पैसा खर्च करना ही है, चाहे बाजार में दें या संस्था में दान स्वरूप दें।


      और जब आपको एक बहुत ही सुन्दर विकल्प मिला है तो समझदारी इसी में है कि आप ये गरीबोत्थान का विकल्प चुनें। घर के सभी लोगों के पंजीकरण भी हो जायेंगे और आपकी 5 लोगों के समूह की भी पूर्ति हो जायेगी।


प्रश्न 35:- अगर कोई व्यक्ति विकलांग, निषक्त, मंदबुद्धि है या कोई अकेला है, किसी भी प्रकार से अपना समूह बनाने में अक्षम है तो उसकी गरीबी कैसे समाप्त होगी?


उत्तर:- सम्भव है ऐसे भी व्यक्ति अपना पंजीकरण करा सकते हैं। इनके लिए हमारे पंजीकृत सामाजिक कार्यकत्र्ता/परियोजना समन्वयक सहायता करेंगे। जैसा कि बताया गया है कि एक स्वयं सेवक को केवल 5 पंजीकरण कराने का अधिकार है और ये उन्हें कराना आवष्यक है मगर प्रेरक/सामाजिक कार्यकत्र्ता/समन्वयक लोगों को असिमित पंजीकरण कराने का मानदेय आधारित अधिकार है।


      नियमानुसार वो केवल 5 पंजीकरण ही स्वयं के लिये करा सकता है बाकि लोगों को अपने समूह में उनको वितरित करेगा जो अपना समूह निर्मित नहीं कर सकते हैं। यह ही तो असली समाज सेवा है, ‘सबका साथ - सबका विकास’!


 


प्रश्न 36:- जब हमें ये मालूम है कि अनुदान खाते में राषि आनी निष्चित है, जल्दी आये या फिर देर में आये तो क्या ऐसा हो सकता है कि अनुदान खाते से ही राषि लेकर 5 पंजीकरण समायोजित कर दिये जाये और बाकि राषि निकाल ली जाये?


उत्तर:- जी हाॅ सम्भव है मगर ये सबके लिए विकल्प नहीं है। अगर सभी लोग ऐसा करेंगे तो नये पंजीकरण नहीं होंगे और ना ही कोई समूह बनेंगे और ना ही कोई सामाजिक कार्य हो पायेंगे।


      कुछ लोगों के लिए ये विकल्प अवष्य ही लागू हो सकता है जो सक्षम नहीं है या बिल्कुल अकेले हैं। ऐसे लोगों के लिए समायोजन करने का आवेदन उनके समूह के प्रेरक देंगें और परियोजना प्रभारी का निर्णय अन्तिम रूप से मान्य होगा।


      निर्धारित लक्ष्य और निर्धारित सामाजिक गतिविधि उन प्रेरकों को करनी होगी जो इनकी समायोजन की सिफारिष करेंगे।


 


प्रश्न 37:- स्वयंसेवक, सामाजिक कार्यकत्र्ता, परियोजना समन्वयक, इन सबके समूह के निर्धारित लक्ष्यों का वर्णन ऊपर कर दिया गया है, मगर प्रत्येक वर्ग के लिए अनुदान की पात्रता हेतू प्रारंभिक सामाजिक कार्य गतिविधियों का लक्ष्य क्या होगा? कृपया स्पष्ट करें।


उत्तर:- सबसे पहले यह स्पष्ट करना आवष्यक है कि नये लोगों को समझाना और उन्हें परियोजना में पंजिकृत कराना सर्वाेपरि एवं सर्वोत्तम सामाजिक कार्य है क्योंकि इस परियोजना में आने पर उन्हें आर्थिक विकल्प मिलेगा और उनके अन्दर देष प्रेम की भावना जाग्रत होगी और अधिक से अधिक लोग समाज सेवा की ओर आकृष्ट होगें। मगर अपना निर्धारित समूह निर्माण के साथ प्रत्येक वर्ग के लिए कुछ निष्चित गतिविधियों में कम से कम एक में शामिल होना आवष्यक होगा। जो निम्नलिखित हैं।


स्वयंसेवक के लिए सामाजिक गतिविधि


संस्था द्वारा प्रकाषित नषामुक्ति, दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या या किसी भी प्रकार के जन जागरूकता के कम से कम 25 पम्पलेट लोगों तक पहुॅचाने होंगे और स्वयं के लिए सार्वजनिक स्थानों पर नषा न करने का शपथ पत्र देंगे वो ही स्वयं सेवक का परिचय पत्र पाने के पात्र होंगे। संस्था द्वारा संचालित किसी भी सार्वजनिक, सामाजिक गतिविधि में शामिल होने वाले लोग भी स्वयं सेवक के पात्र होंगे।


      अगर स्वयं सेवक अवयस्क है तो उनके अभिभावक अथवा सामाजिक कार्यकत्र्ता उनके लिए ये कार्य सम्पन्न करेंगे।


सामाजिक कार्यकत्र्ता के लिए सामाजिक गतिविधि


1.   किसी भी प्रकार की सामाजिक बुराईयों जैसे नषाखोरी, चोरी, जुआ आदि में लिप्त ना हो। कोई भी नषा कम से कम सार्वजनिक स्थानों में न करे, इस आषय का स्वहस्ताक्षरित शपथ पत्र देना होगा।


2.   अपनी इच्छानुसार कम से कम एक पौधा रोपण घर या बाहर कहीं पर भी करें अथवा अगर घर का पानी रास्ते पर बह रहा है तो पानी सोखता गढ्ढा बनाये अथवा घर में तुलसी का पौधा रोपन करे अथवा घर में गाय, भैंस, बकरी जैसा कोई दुधारू पशु का बच्चा पालना प्रारम्भ करें अथवा घर में पड़ी खाली जमीन का सदुपयोग सब्जी भाजी की छोटी मोटी बागवानी के लिए शुरू करे अथवा किसी प्राथमिक शाला में जाकर 20-30 मिनट तक छोटे बच्चों को उज्जवल भविष्य के लिए प्रेरित करे अथवा कोई भी ऐसा कार्य जो उन्हें लगता है कि समाज सेवा से सम्बन्धित है उसे सार्वजनिक रूप से कम से कम एक बार अवष्य करे जैसे पक्षियों या जानवरों के लिए कहीं घर के आस - पास पानी का पात्र रख देना। आने जाने वालों के लिए घर के बाहर एक पानी का मटका रख देना।


3.   संस्था द्वारा की गयी कोई भी सार्वजनिक, सामाजिक गतिविधि में शामिल होने वाले लोग भी सामाजिक कार्यकत्र्ता कहलायेंगे।


तात्पर्य है कि आपको अपनी संतुष्टि के हिसाब से कोई भी एक सामाजिक कार्य सामाजिक रूप से प्रमाण सहित करना ही होगा तभी आप स्वयं को सामाजिक कार्यकत्र्ता कह सकेंगे।


प्रश्न 38:- परियोजना समन्वयक वरिष्ठ सामाजिक कार्यकत्र्ता एवं प्रेरक के लिए अनुदान की सीमा और कत्र्तव्यों आदि की क्या रूप रेखा होगी?


उत्तर:- परियोजना समन्वयक बनने के लिए सामाजिक कार्यकत्र्ताओं को अपने निर्धारित समूह निर्माण एवं सामाजिक गतिविधि पूर्ण करने के उपरंात परियोजना के प्रषिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित रहना होगा। प्रषिक्षणोपरंात होने वाली कोई भी सामाजिक गतिविधि जैसे जनजागरूकता रैली, सफाई अभियान आदि कार्यक्रमों के श्रमदान में शामिल होना होगा।


      प्रषिक्षणोपरंात होने वाली लिखित/मौखिक परीक्षा में कम से कम 60 प्रतिषत अंक से उत्तीर्ण होना होगा। जिसका उन्हें प्रमाण पत्र प्रदान किया जायेगा। इसके बाद प्रेरक एवं वरिष्ठ सामाजिक कार्यकत्र्ता समूह निर्धारण के आधार पर स्वतः प्रोन्नत होते रहेंगे। परियोजना समन्वयक प्रोन्नत होने पर अनुदान खाते की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 25 लाख की जाती है और इनकी प्रतिमाह अनुदान की सीमा भी समूह की परिपक्वता के आधार पर निम्नरूप से बढ़ती है।


एक परियोजना समन्वयक एक माह में अधिकतम रू. 40000/- की अनुदान राषि प्राप्त कर सकता है। इसके लिए उसकी नये पोरटल वाली प्रविष्टि पर कम्प्यूटर द्वारा भूरे रंग का चिन्ह अंकित होना चाहिए/अनुदान खाते में पर्याप्त राषि उपलब्ध होनी चाहिए। इसमें स्वयं सेवक की प्रविष्टि पर आयी सम्पूर्ण राषि और सामाजिक कार्यकत्र्ता की प्रविष्टि पर केवल स्वतः प्रसार योजना की राषि ही समायोजित हो सकती है।


जिस व्यक्ति के परियोजना समन्वयक के निजि समूह में कम से कम 5 परियोजना समन्वयक (क्रियाषील अथवा अक्रियाषील) सीधे तौर पर जुड़े होंगे वो प्रविष्टि भूरे रंग से प्रदर्षित होगी और ये वरिष्ठ सामाजिक कार्यकत्र्ता कहलाऐंगे।


परियोजना समन्वयक के व्यक्तिगत समूह में 6 वरिष्ठ सामाजिक कार्यकत्र्ता कम्प्यूटर द्वारा आबंटित अनुदान खाता क्रमंाकों पर होंगे वो एक माह में रू. 50,000/- तक की अनुदान राषि प्राप्त करने के पात्र होंगे। इसके लिए खाते में पर्याप्त राषि उपलब्ध होनी चाहिए और कम्प्यूटर में नये पोरटल की प्रविष्टि पर हरा चिन्ह होना चाहिए।


इन लोगों को प्रेरक प्रतिनिधि का नाम दिया गया है और ये सभी प्रकार की योजनाओं से लाभान्वित होने के पात्र है।


अतः एक वरिष्ठ सामाजिक कार्यकत्र्ता की एक माह की अनुदान सीमा रू. 40,000/- हैं।


      एक प्रेरक प्रतिनिधि की मासिक अनुदान सीमा रू. 50,000/- है।


प्रश्न 39:- स्वयं सेवक अथवा सामाजिक कार्यकत्र्ताओं, परियोजना समन्वयकों को अनुदान राषि की जानकारी दी गयी है मगर समूह विकास, प्रचार - प्रसार के लिए क्या प्रावधान है अर्थात नकद मानदेय किस मद में कितना और किस प्रकार मिलता है?


उत्तर:- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है ‘षुभाकंाक्षा’ एक स्ववित्तपोषित - स्वरोजगार योजना है जिसका मूल उद्देष्य बेरोजगारी एवं गरीबी उन्मूलन के साथ ‘स्वर्णिम भारत निर्माण’ है और यह मूलरूप से व्यक्तिगत दानराषि से संचालित होने वाला माॅडल है।


      परियोजना के नियमानुसार केवल परियोजना समन्वयक को ही नये स्वयंसेवकों के पंजिकरण एवं परियोजना के प्रचार - प्रसार हेतू अधिकृत किया गया है। प्रत्येक स्वयंसेवक को अपना केवल 5 लोगों का समूह निर्माण करना है एवं नियमानुसार यह उनका कत्र्तव्य है एवं इसके लिए कोई मानदेय नहीं दिया जाता।


      परियोजना समन्वयक को जो मानदेय राषि दी जाती है वह उसकी रोजी रोटी चलाने में आर्थिक मदद एवं समूह विस्तार में होने वाले उसके खर्चों की भरपाई एवं प्रपत्र, शपथ - पत्र और अन्य प्रचार सामग्री के मुद्रण एवं फोटोकाॅपी आदि हेतू प्रदान की जाती है। इस राषि का सदुपयोग परियोजना समन्वयक अपनी इच्छानुसार करते हैं अतः वो लोग नये पंजीकरण कराने वाले लोगों को निर्धारित समूह निर्मित करने हेतू प्रेरित करते समय अपनी मानदेय राषि से उन्हें कुछ नकद राषि या उपहार आदि देने को स्वतंत्र हैं ताकि वे लोग आसानी से अपना समूह तैयार कर सकें।


      ऐसा इसलिए है क्योंकि एक आम, अषिक्षित, गरीब व्यक्ति को पता नहीं है कि इस परियोजना का क्या महत्व है ना ही उसे देष भक्ति का अधिक ज्ञान है वो तो केवल अपनी रोजी रोटी तक सीमित रहता है, कुछ नकद आदि राषि मिलती है तो वो संतुष्टि पूर्वक कुछ कदम चल पाता है।


प्रश्न 40:- संस्था में और परियोजना संचालन एवं विभिन्न योजनाओं के संचालन हेतू संगठनात्मक ढ़ांचे में किस मद में कितनी दानराषि ली जाती है? और इसमें कार्यकत्र्ताओं को मानदेय किस मद से कितना और किस प्रकार प्रदान किया जाता है?


उत्तर:- संस्था के संविधान के अनुसार वर्तमान समय में राष्ट्रीय कार्यकारिणी हेतू रू. 5000/- आजीवन सदस्यता शुल्क है एवं रू. 1 लाख राष्ट्रीय संरक्षक सदस्य के लिए दानराषि निर्धारित की गयी है। शीघ्र ही ये राषि बढ़ाने का प्रावधान है।


      परियोजना संचालन एवं विभिन्न स्तर पर आने वाली दानराषि का निर्धारण परियोजना प्रभारी द्वारा कुछ इस प्रकार तैयार किया गया है ताकि गरीब से गरीब व्यक्ति को भी परियोजना से जोड़ कर शनै शनै मुख्य धारा तक लाया जा सके।


विभिन्न स्तरों पर ली जाने वाली अधिकतम दानराषि -


ऽ        स्वयंसेवक - रू. 250/- मात्र (आवष्यक सर्वथा)


ऽ        परियोजना समन्वयक - रू. 2000/- मात्र (ऐच्छिक)


ऽ        जनपद स्तर आजीवन सदस्य - (ऐच्छिक)


ऽ        रू. 1100/- आजीवन सदस्यता की दानराषि (ऐच्छिक)


ऽ        जनपद स्तर के संरक्षक सदस्य -


ऽ        रू. 21000/- नकद और एक उद्घाटन कार्यक्रम का खर्च


ऽ        जिला स्तरीय आजीवन सदस्य (ऐच्छिक)


ऽ        रू. 2100/- आजीवन सदस्यता की दानराषि (ऐच्छिक)


ऽ        जिला स्तरीय संरक्षक सदस्य (ऐच्छिक)


ऽ        रू. 51000/- की नकद दानराषि एवं एक उद्घाटन कार्यक्रम का खर्च।


ऽ        राष्ट्रीय स्तर के आजीवन सदस्य रू. 5000/- (ऐच्छिक)


ऽ        राष्ट्रीय संरक्षक का सदस्यता शुल्क रू. 1,00,000/- (ऐच्छिक)


इसमें केवल स्वयंसेवक के लिए रू. 250/- की दानराषि संस्था में किसी भी रूप में जुड़ने हेतू आवष्यक है। इसके अतिरिक्त सभी दानराषि या ऐच्छिक है और ये सब राषियंा एक निष्चित पद और पदाधिकार हेतू एवं परियोजना ‘स्वर्णिम भारत निर्माण’ के सुचारू रूप से संचालन हेतू तय की गयी है। ज्ञात रहे कि हम स्ववित्तपोषित स्वरोजगार का संचालन कर रहे हैं।


उपरोक्त राषियों के अलावा जो भी दानराषि कोई देना चाहेगा वह स्वीकार्य है और उसका सदुपयोग परियोजना संचालन में ही किया जायेगा। कुछ अन्य भी राषि परियोजना में आती है, जो विज्ञापन की राषि है। जिसके लिए अलग सारणी बनायी गई है।


प्रश्न 41:- ये सब दानराषि किसी ना किसी के माध्यम से संस्था तक आती है तो विभिन्न स्तर पर स्वयं सेवकों, सामाजिक कार्यकत्र्ताओं, उप समितियों आदि को मिलने वाला मानदेय का क्या प्रावधान है?


उत्तर:- सभी स्तर के कार्यकत्र्ताओं, उपसमितियों हेतू मानदेय राषि आबंटन का एक निष्चित मापदंड है, तथा सभी परियोजना समन्वयकों को यह मानदेय आबंटन सारणी प्रदान की गई है। (मानदेय चार्ट संलग्न)


प्रश्न 42:- मानदेय चार्ट के अनुसार स्वयं सेवकों को मानदेय स्वयं सेवकों से प्राप्त दानराषि से नहीं मिलेगा तो फिर वे लोग कैसे नये स्वयं सेवकों को संस्था में पंजिकृत करायेंगे?


उत्तर:- नियम के अनुसार प्रत्येक स्वयं सेवक को कम से कम 5 स्वयं सेवकों का पंजीकरण कराना आवष्यक है। परियोजना का आर्थिक लाभ लेना होगा तो ये करना ही होगा। मगर हम जानते हैं कि स्वयंसेवक पंजीकरण कराने वाले अधिकतम अषिक्षित, अल्पषिक्षित और गरीब वर्ग के लोग होते हैं। अतः इसमें वे लोग परियोजना समन्वयक/सामाजिक कार्यकत्र्ताओं की सहायता से ये कार्य संपन्न करेंगे।


      परियोजना समन्वयक को एक स्वयं सेवक के पंजीकरण पर कुल मानदेय रू. 40/- मिलता है तथा रू. 5/- उपहारादि लाने ले जाने का और रू. 5/- इंटरनेट का खर्चा मिलता है इस प्रकार कुछ रू. 50/- मानदेय बनता है।


      नये पंजीकरण अगर कोई स्वयं सेवक कराता है तो उसके लिए परियोजना समन्वयक उन्हें फार्म उपलब्ध करायेगा और 5 पंजीकरण कराने में उनकी मदद भी करेगा।


प्रश्न 43:- जो कम्प्यूटर से अनुदान गणना का साॅफ्टवेयर बनाया है, उसमें राषि कहाॅ से और कैसे आयेगी? ये कैसे संभव है कि लोगों को लाखों का अनुदान मिलता रहेगा? कहीं ये काल्पनिक तो नहीं हैं?


उत्तर:- ये एक अनन्य परिकल्पना है जो लोगों के मनोविज्ञान, निष्चित अंषदान और गणित पर आधारित है। जो फाॅर्मूला तैयार किया गया है वह अत्यंत गोपनीय है तथा हमारा उस पर एकमात्र अधिकार है। वह गुप्त है और उसे आम नहीं किया जा सकता। जो इस परियोजना का राष्ट्रीय संरक्षक होगा केवल उसी को ये परिकल्पना एवं सूत्र बताया जा सकता है या फिर परियोजना प्रभारी (इस फाॅर्मूला को तैयार करने वाले) अपने विष्वास पात्र लोगों को शेयर कर सकते हैं।


      अगर कोई सरकारी आवष्यकता होगी तो भी इस फाॅर्मूला को उचित और सक्षम मंच पर प्रदर्षित किया जा सकेगा।


      ये शत प्रतिषत स्वयं सिद्ध परियोजना है, इस पर दी गई निर्धारित शर्तें पूरी होती रहने पर बेषक हम ‘स्वर्णिम भारत निर्माण’ को साकार करने में सफल हो जायेंगे, इसे उपयुक्त मंच पर सिद्ध किया जा सकता है।


प्रश्न 44:- क्या कोई राजनीतिक व्यक्तित्व अथवा राजनितिक दल भी इस परियोजना में शामिल हो सकता है? कोई राजनैतिक व्यक्ति या राजनीतिक पार्टी संस्था को या परियोजना को संरक्षण प्रदान कर सकते हैं?


उत्तर:- आप जानते हैं कि सामाजिक संस्था और राजनीतिक दल दोनों अलग - अलग होते हुए भी एक है। दोनों का मूल उद्देष्य तो समाज सेवा ही है। व्यक्तिगत तौर पर मैं बेषक किसी भी राजनैतिक पार्टी का समर्थक हो सकता हूॅ मगर समाज सेवा क्षेत्र में किसी परियोजना पर किसी पार्टी का ठप्पा अगर लगता है तो यह केवल तब ही संभव है जब कोई पार्टी या राजनीतिक व्यक्ति संपूर्ण भारत में इस योजना को संरक्षण प्रदान करें अथवा इसे गोद लें और इस आषय का लिखित शपथपत्र देते हुए संस्था की वैधानिक आवष्यकताओं को पूर्ण करें।


      परियोजना के मूल परिकल्पक एवं सूत्राधार होने के नाते मुझे संपूर्ण भारत में प्रत्येक विधान सभा में कम से कम एक विधायक एवं प्रत्येक संसदीय क्षेत्र के लिए एक संासद की या इनके समकक्ष सामाजिक स्तर प्राप्त सामाजिक कार्यकत्र्ता अथवा राजनीतिक व्यक्ति की आवष्यकता है। ये लोग विभिन्न राजनीतिक दलों से संबंधित भी हो सकते हैं। क्योंकि परियोजना का मूल उद्देष्य ‘स्वर्णिम भारत निर्माण’ करना है ना की राजनीति करना।


प्रश्न 45:- एक राजनीतिक व्यक्ति को इस परियोजना का लाभ किस प्रकार मिलेगा?


उत्तर:- प्रत्येक विधानसभा में और संसदीय क्षेत्र में कम से कम एक मुख्य संरक्षक होगा। इस के बाद ग्राम पंचायत स्तर तक मानदेय, अनुदान आधारित सामाजिक कार्यकत्र्ताओं का संगठन तैयार किया जायेगा तथा प्रत्येक स्तर की टीम को मुख्य रूप से 2-3 राजनीतिक/समर्पित सामाजिक कार्यकत्र्ता संचालित करते हुए पूरे क्षेत्र में परियोजना का संचालन होगा।


      क्योंकि परियोजना का प्रारूप इस प्रकार तैयार किया गया है कि गरीबी, षिक्षा, भुखमरी, बेरोजगारी, नषा, जल संरक्षण, चिकित्सा, कुप्रथाओं एवं पर्यावरण पर सटीक एवं स्वयंसिद्ध योजनाओं का संचालन किया जायेगा साथ ही भारत के आम नागरिकों की सभी धार्मिक, जातिगत, पारिवारिक, समस्याओं के निवारण हेतू कार्य होंगे एवं सभी सरकारी एवं गैरसरकारी समस्याओं का समाधान उचित माध्यम से किया जायेगा।


      क्योंकि इन सब कार्यक्रमों में प्रत्येक जगह संरक्षक लोगों का नाम और सम्मान होगा, सब कुछ उनकी उपस्थिति एवं अनुमोदन पर होगा तो जाहिर है जन - जन तक उन्हीं का नाम होगा।


      आम व्यक्ति को क्या चाहिए, समस्याओं का निवारण और जिसके माध्यम से समस्या निवारण होगी निष्चित है कि उनका जनाधार विकसित होगा और वह किसी भी राजनीतिक दल का हो, व्यक्तिगत रूप से वह एक मजबूत नेता अथवा सामाजिक कार्यकत्र्ता बनेंगे।


प्रश्न 46:- अगर परियोजना को संस्था को कोई सरकारी अनुदान नहीं मिलता तो परियोजना कैसे चलेगी और बड़ी - बड़ी परियोजनाएं कैसे चलाएगी संस्था?


उत्तर:- परियोजना का प्रारूप इस प्रकार बनाया गया है कि सरकारी अनुदान नहीं भी मिले तो भी संचालन नहीं रूकेगा। लेकिन वास्तविकता यह है कि कोई भी सरकार हो उन्हें उत्तम और परिणामदाता संस्थाओं की सर्वथा आवष्यकता रहती है। अगर हम कुछ उद्देष्यों को लेकर कार्य कर रहे हैं और परिणाम दे रहे हैं तो फिर सरकारी योजनाएं और अनुदान क्यों नहीं मिलेंगे?


      हम यथा समय उचित रूप में अपनी उपसमितियों के माध्यम से उनके क्षेत्र के लिए और राज्य एवं केन्द्र सरकारों को विभिन्न योजनाओं हेतू अपना पक्ष रखेंगे और अनुदान के आवेदन भी देंगे। समयानुसार अनुदान प्राप्त भी होंगे, निष्चित रहिए।


      जीत हमेषा सत्य की ही होती है।


प्रश्न 47:- अनुदान खाते से धनराषि कैसे निकलेगी? क्या नकद या चैक से मिलेगी? कृपया स्पष्ट कीजिए।


उत्तर:- उपसमितियों के माध्यम से ये राषियंा वितरित होगी। संपूर्ण लेखा जोखा मुख्य कार्यालय में राष्ट्रीय प्रबंधकारिणी में रहेगा। परियोजना समन्वयकों के लिए यथा समय, यथोचित निर्देष इसके लिए प्रेषित होंगे और ये लोग स्वयंसेवकों तक अनुदान राषि का वितरण किये गये कार्यों के अनूरूप करेंगे।


प्रश्न 48:- आम नागरिक की बहुत सारी समस्याएं होती हैं जैसे सरकारी योजनाओं का लाभ उन्हें दिलवाना, घरेलू झगड़े और समस्याएं, धार्मिक झगड़े, स्थानीय प्रषासनिक कामकाज, विद्यार्थियों एवं युवाओं को दिषा निर्देष, चिकित्सा संबंधित समस्याएं, जागरूकता की कमी आदि। इन सबका निवारण करने के लिए परियोजना में क्या प्रावधान हैं?


उत्तर:- प्रत्येक जिले में परियोजना का एक मुख्य परामर्ष एवं जन जागरूकता केन्द्र स्थापित होगा। जिसका संचालन वहाॅ की समिति करेगी एवं नेतृत्व समिति का संरक्षक मंडल करेगा। जो मुख्यतः किसी राजनैतिक पार्टी के शीर्ष पदाधिकारी होंगे और इसी तरह विधान सभा क्षेत्र के संरक्षक मंडल में विधायक, पूर्व विधायक अथवा भावी विधायक होंगे या फिर कोई महत्वपूर्ण सामाजिक कार्यकत्र्ता होंगे।


      जिले में प्रत्येक ग्राम पंचायत एवं कस्बों में हमारे परियोजना समन्वयकों के निजि कार्यालय होंगे जोकि परियोजना के सभी कार्यक्रमों का संचालन करेंगे एवं परामर्ष और जनजागरूकता केंद्र की उपषाखाएं भी कहलाएंगी। सभी के बैनरों पर उस विधानसभा के नेतृत्व का नाम, फोटो भी रहेगा। इनके माध्यम से ही लोगों की सभी समस्याओं जैसे गरीबी राषन कार्ड, आवास योजनाएं, पर्यावरण संबंधित सभी योजनाएं अथवा जो भी सरकारी योजनाएं उनके लिए उपयुक्त होगी उनका लाभ उन तक पहुॅचाया जायेगा। जनपद स्तर पर उप परामर्ष केंद्र स्थापित किये जायेंगे।


      लोगों की षिकायतें भी इन्हीं समन्वयकों के माध्यम से सुलझाने का प्रयास होगा एवं आवष्यक होने पर विधान सभा नेतृत्व, जिला नेतृत्व, सांसद क्षेत्र नेतृत्व, राज्य नेतृत्व अथवा राष्ट्रीय नेतृत्व तक इन स्थानीय व्यक्तिगत एवं सामूहिक और क्षेत्रीय समस्याओं को पहुॅचाया जायेगा और इनका समाधान कराया जायेगा।


      इस प्रकार सरकारी योजनाएं और जागरूकता कार्यक्रम अंतिम व्यक्ति तक सुचारू रूप से पहुॅचेगी, छोटे - छोटे झगड़ों को स्थानीय स्तर पर सुलझाने से पुलिस और अदालतों पर अनावष्यक बोझ कम होगा और लोगों का समय भी बर्बाद नहीं होगा।


प्रश्न 49:- परामर्ष एवं जनजागरूकता केन्द्रों के संचालन का ये कार्यक्रम वास्तव में बहुत अच्छा है, लोगों का बहुत लाभ होगा और सरकार की योजनाएं आम व्यक्तिगत पहुॅचेगी, मगर जो लोग इन ग्रामीण स्तरीय केन्द्रों का संचालन करेंगे उन्हें आर्थिक लाभ क्या होगा? मुफ्त की समाज सेवा कैसे संभव होगी?


उत्तर:- सैकड़ों, हजारों, लाखों नहीं बल्कि करोड़ों युवक, युवती, षिक्षित भी हैं और बेरोजगार भी और उनकी जनता की भलाई के लिए बनायी गयी सैकड़ों योजनाएं पूर्णरूप से जनता तक नहीं पहुॅच रही हैं। इन्हीं योजनाओं का लाभ लेने के लिए लोगों को रिष्वत देनी पड़ती है और प्रषासनिक तंत्र को भी भ्रष्टाचार करने का अवसर मिलता है।


      हमारे समन्वयक एक निष्चित सेवा शुल्क दानराषि के रूप में लोगों से लेंगे जो उनके खर्चे पूरे करेगा, उनकी रोजी रोटी चलाऐगा तथा पूरे गाॅव का कार्य करने के लिए कुछ लोग अधिकृत रहेंगे जो पूरा कार्य नियमानुसार करेंगे और प्रषासन को बिना किसी भ्रष्टाचार के बिना रिष्वत खोरी के ये कार्य निष्चित समय सीमा में करने ही होंगे।


      इस प्रकार आम व्यक्ति का घर बैठे काम होगा, उसे योजनाओं का पूर्ण लाभ मिलेगा, सरकार का कार्य भी होगा, स्थानीय नेतृत्व का आधार दृढ़ होगा, सामाजिक कार्यकत्र्ताओं को रोजगार मिलेगा, भ्रष्टाचार, रिष्वत खोरी बंद होगी केवल पात्र हितग्राहीयों को लाभ मिलेगा, सरकारी तंत्र को भी अगर कोई जाॅच पड़ताल करनी है तो पूरा रिकार्ड एक स्थान पर उपलब्ध होगा। लोग देष सेवा, समाज सेवा में जुड़ेंगे, ‘स्वर्णिम भारत निर्माण’ में और क्या चाहिए।


प्रश्न 50:- क्या परामर्ष केन्द्रों पर कोई भी आम व्यक्ति किसी सेवा के लिए आवेदन प्रस्तुत कर सकता है?


उत्तर:- जी हाॅ कोई भी भारतीय नागरिक किसी परियोजना समन्वयक, परामर्ष, जनजागरूकता केन्द्र, जनसेवा केन्द्र, उपहार वितरण केंद्र से सेवा ले सकता है, बषर्तें की उसका पंजीकरण संस्था की परियोजना में स्वयं सेवक के रूप में हो।


प्रश्न 51:- जैसे बाकि गैरसरकारी संगठन सरकार से विभिन्न योजनाओं पर अनुदान लेते हैं, क्या इस संस्था को भी मिल सकता है? उसकी क्या प्रक्रिया है?


उत्तर:- ‘षुभाकंाक्षा’ परियोजना के कार्यक्रमों का संचालन तो सभी स्तरों पर केवल एक - एक परियोजना समन्वयक और प्रेरक भी कर सकते हैं और करेंगे भी। मगर हम प्रत्येक जिले में और प्रत्येक जनपद में जो उपसमितियंा बना रहे हैं उनका रिकार्ड स्थानीय प्रषासन को दिया जायेगा।


      जो भी उद्देष्य संस्था के पंजिकृत हैं हमारी उपसमितियंा भी उनके लिए अनुदान लेने के लिए वैद्य है। संस्था के मुख्य कार्यालय से सभी उपसमितियों को यथोचित मार्गदर्षन प्रदान किया जायेगा, आवष्यकता होने पर उच्चतर अथवा उच्चतम स्तर तक अनुदान के आवेदन भी प्रदान किये जा सकते हैं।


      अन्ततः स्थानीय उपसमितियों के प्रयास अतिआवष्यक है। प्रत्येक जिले में खाली पड़ी सरकारी जमीन का आबंटन कराके गौवंष संरक्षण एवं संवर्धन के केन्द्रों की स्थापना करना जिला उपसमितियों का सर्वोपरि लक्ष्य होगा।


      और इसी प्रकार प्रत्येक जनपद में एक नैतिक एवं सामाजिक षिक्षा केन्द्र की स्थापना भी जनपद स्तरीय उपसमितियों की सर्वोपरि प्राथमिकता हैं।


      आप लोग कर्मठ बने और आष्वस्त रहिए, ये सभी कार्य होने सुनिष्चित है, कारण है कि सभी सरकार, राजनेता, जन प्रतिनिधि, परिणामदाता संस्थाओं के साथ जुड़ते हैं और सहयोग करते हैं और इसमें कोई शक नहीं है कि हम लोग परिणाम के लिए ही काम करते हैं।


प्रश्न 52:- क्या ये संस्था प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से किसी राजनैतिक पार्टी के लिए अथवा किसी पार्टी विषेष से जुड़े राजनेताओं के लिए कार्य कर रही है? विभिन्न स्तरों पर संरक्षकों का चुनाव किस प्रकार होगा?


उत्तर:- इसमें कोई शक नहीं हैं कि ‘स्वर्णिम भारत निर्माण’ की परिकल्पना और ‘षुभाकंाक्षा’ परियोजना का प्रारूप और परियोजना से मिलने वाले परिणाम, सब कुछ विस्फोटक हैं। ये माॅडल सफल होता है तो निष्चित रूप से ‘स्वर्णिम भारत निर्माण’ की परिकल्पना साकार होगी एवं देष में गरीबी का स्तर सुधरना प्रारंभ होगा जो तीव्र गति से सुधरते हुए देष में साम्यवाद की स्थापना करेगा।


      जब ये सब होगा तो ये भी निष्चित है कि जो लोग इस परियोजना का विभिन्न स्तरों पर नेतृत्व करेंगे, संरक्षण प्रदान करेंगे, राजनैतिक चुनावों में उन्हें आषातीत सफलताओं की प्रबल संभावना है। इसमें कोई शक नहीं है कि नेतृत्वकत्र्ता अधिकतर राजनैतिक पार्टीयों के प्रतिनिधि और राजनेता ही होंगे। उन्हें साथ लेकर चलना हमारी आवष्यकता है क्योंकि देष को तो राजनेताओं को ही चलाना है, हम तो अंततः सामाजिक कार्यकत्र्ता ही हैं।


      मैं स्वयं इस विषय पर बहुत गंभीर हूॅ। अगर राजनैतिक प्रतिद्वंदता में परियोजना फंस गयी तो चलाना मुष्किल हो जायेगा। इसलिए हमने निष्चय किया है कि प्रत्येक विधानसभा में उपयुक्त व्यक्ति को वहीं के परियोजना समन्वयकों के परामर्ष पर नेतृत्व करने की प्रार्थना की जायेगी। हमें उपयुक्त राजनेता के लिए कार्य करना चाहिए फिर वो चाहे किसी भी पार्टी से संबद्ध हों क्योंकि अंततः हम देष के लिए देष की जनता के लिए कार्य करना चाहते हैं। बस हमारा लक्ष्य प्रत्येक विधान सभा क्षेत्र में ऐसे राजनेता अथवा महत्वपूर्ण व्यक्ति का नेतृत्व प्राप्त करना होगा जो वास्तव में सर्वधर्म संभाव, साम्यवाद और समाजवाद, ‘सबका साथ - सबका विकास’ में विष्वास रखते हों। किसी पार्टी विषेष के लिए कार्य करना संस्था के लिए अहितकर हो सकता है। अगर कोई पार्टी राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर संरक्षक बनती है तो अलग बात है।


प्रश्न 53:- अगर कोई राजनैतिक पार्टी अथवा कोई बड़ा पूंजीपति घराना इस परियोजना को गोद लेना चाहे तो क्या ऐसा किया जा सकता है?


उत्तर:- जी बिल्कुल किया जा सकता है। कोई भी राजनैतिक पार्टी अथवा पूंजीपति देष हित में इस परियोजना को गोद ले सकते है। मैं स्वयं इस आषय के पत्र कई बड़े नेताओं को लिख चुका हूॅ तथा पत्रों की पावती या प्रेषित करने के प्रमाण रखें हैं। प्रमाण इसलिए रखता हूॅ कि अगर किसी पार्टी ने इस परियोजना को गोद ले लिया तो दूसरी पार्टियंा ये नहीं कह सकेगी कि हमें सूचित नहीं किया गया।


      मगर यह सत्य है कि कम से कम प्रदेष स्तर पर ही इस योजना को गोद दिया जा सकता है वैसे प्रयास ये रहेंगे कि राष्ट्रीय स्तर पर ही कोई दल इसे लें।


      कोई पार्टी परियोजना में कितनी दानराषि देगी इससे विषेष फर्क नहीं पड़ेगा। हमारी शर्त केवल ये है कि जो दल अथवा व्यक्ति विषेष संरक्षण प्रदान करें वो सर्वप्रथम परियोजना का स्वयंसेवक का शपथ पत्र भरे और परियोजना का संचालन हम स्वयं जैसे कर रहे हैं, अपने नियमानुसार ही करें। कालांतर में परियोजना में करोड़ों, अरबों का लेन देन हो सकता है, यह संभव है, अगर किसी संरक्षक दल, व्यक्ति के पैसे के लेन देन में कालांतर में भ्रष्टाचार अथवा घोटाले की आषंका हो तो राष्ट्रीय कार्यकारिणी में कोषाध्यक्ष के लिए उनका स्वागत रहेगा।


      कोई भी परियोजना का स्वयं सेवक, सामाजिक कार्यकत्र्ता, समन्वयक अथवा प्रेरक अगर किसी ऐसे स्थानीय व्यक्ति विषेष से संपर्क करना चाहे जो राज्य स्तरीय, राष्ट्रीय स्तरीय राजनेता अथवा बड़े पूॅजीपति घराने तक पहुॅच सकें तो मैं उनका साथ देने को तत्पर रहूॅगा।


      किसी भी मंच पर इस परियोजना अथवा माॅडल का विस्तार पूर्वक वर्णन एवं इसकी सत्यता सिद्ध करने को सदैव तैयार हूॅ।


प्रश्न 54:- कई प्रकार के महिला मंडल, स्वयं सेवक समूह, छोटे बड़े स्थानीय सामाजिक संगठन जो क्रियाषील  है क्या उन्हें भी इस परियोजना का लाभ दिलाया जा सकता है? इसकी क्या प्रक्रिया होगी?


उत्तर:- जी हाॅ, ऐसा कोई भी संगठन या समूह अगर अपनी आय बढ़ाना चाहता है या संगठन को मजबूत करना चाहता है तो उनका हम स्वागत करते हैं। उन्हें उस संगठन के नाम से एक साधारण पंजीकरण हमारी परियोजना में कराना होगा अर्थात अनुदान खाता खुलवाना होगा और संगठन के दस्तावेज की सत्यापित फोटोप्रतियंा शपथ पत्र के साथ मुख्य कार्यालय को जमा करने होंगे। तत्पष्चात् उन्हें संपूर्ण मार्गदर्षन प्रदान करते हुए यथोचित सहयोग प्रदान किया जायेगा।


प्रश्न 55:- अगर कोई राजनैतिक व्यक्ति किसी स्तर विषेष पर संस्था को संरक्षण प्रदान करता है तो उसे किस प्रकार लाभ होगा?


उत्तर:- पीछे भी वर्णन किया जा चुका है हमारी परियोजनानुसार हमारा उद्देष्य सबको सम्मान के साथ आर्थिक सहायता और देष का समग्र विकास है। प्रत्येक शपथ - पत्र, बैनर, प्रचार - प्रसार सामग्री में राष्ट्रीय, राज्य स्तरीय, सांसद क्षेत्र, जिला स्तरीय, जनपद स्तरीय संरक्षकों के नाम छपेंगे। सर्वप्रथम उन लोगों का प्रचार प्रसार स्वतः होगा जिससे जनाधार बढ़ेगा, संपूर्ण समूह उनसे ही जुड़ेगा तो अनुदान खाते में धनराषि भी मिलेगी और लोगों की समस्याएं घर बैठे हल होगी तो सम्मान मिलेगा और उनके नेतृत्व में समग्र विकास कार्यक्रम होंगे तो सरकार में और राजनैतिक पार्टी में महत्व स्वयं बढ़ेगा। इसके अतिरिक्त और क्या लाभ चाहिए?


प्रश्न 56:- अगर परियोजना का या कार्यक्रम का या किसी सामाजिक कार्यकत्र्ता का कोई द्वेषभाव से कोई राजनैतिक पार्टी, व्यक्ति, कोई संगठन विरोध करते हैं, तो क्या होगा?


उत्तर:- जब भी कोई उपसमिति बनती है तो उसके नियुक्ति पत्र की प्रतियंा स्थानीय पुलिस विभाग एवं प्रषासन को इसीलिए प्रदान की जाती है ताकि समय आने पर उनकी सहायता ली जा सके। ऐसी कोई घटना होने पर तुरंत स्थानीय नेतृत्व को सूचित करें एवं लिखित में मुख्य कार्यालय/परियोजना प्रभारी को की जानी चाहिए ताकि ऐसे समाज विरोधी तत्वों से संपर्क किया जा सके।


      आवष्यकता होने पर पुलिस, प्रषासन और न्यायालय की सहायता ली जायेगी।


प्रश्न 57:- अगर कोई व्यक्ति, संगठन इस परियोजना की आंषिक या किसी भी रूप में नकल करें, किसी अन्य नाम से स्वयं चलाए अथवा स्वयं पर्दे के पीछे रहकर किसी को प्रेरित करे तो इनसे निपटने का क्या प्रावधान है?


उत्तर:- इस परियोजना की स्थापना 2007 में की गयी थी तथा तब से लेकर आज तक सभी नियमावली, निर्देषिकाएं एवं पुस्तकें, संषोधन आदि और योजनाएं मेरे पास उपलब्ध है। 2008 में ही योजना के संक्षिप्त प्रारूप सरकार एवं प्रषासन को भेजे जा चुके हैं और प्रमाण हमारे पास उपलब्ध हैं।


      ऐसा कुछ करना सीधा काॅपीराइट का उल्लंघन है। इसमें सीधा जेल और मानहानि का प्रावधान है।


प्रश्न 58:- अगर सरकार ही इस संस्था को बंद करा दे या कुछ ऐसे कानून लागू कर दे जिनके विरूद्ध संस्था की कार्यवाही जाती है तो फिर क्या होगा?


उत्तर:- ये प्रष्न काल्पनिक है। कौन सरकार ये चाहेगी कि देष का विकास न हो, गरीबी कम न हो, लोग खुषहाल न हो, अतः सरकार द्वारा बंद कराने वाली बात ही गलत है फिर भी आप लोगों को स्पष्ट कर देते हैं देष् भी कुछ कानूनों से प्रतिबंधित रहते हैं। अंर्तराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग भी होता है। अतः ऐसा कदापि नहीं होगा।


      अंततः अगर ऐसा होता भी है तो हम सरकार से ये ही आग्रह करेंगे कि संस्था में जुड़े सभी लोगों को खुषहाल कर दीजिए, या फिर हमें कर लेने दें।


प्रश्न 59:- हम जानते हैं कि संस्था में जो भी धनराषि आती है वह दान या अनुदान से ही आती है। कुछ आजीवन सदस्यता लेते है और 5000 रू. का दान करते हैं। क्या इस राषि से उन्हें कोई अतिरिक्त आर्थिक लाभ भी मिलता है? परियोजना समन्वयकों को अथवा सामाजिक कार्यकत्र्ताओं को कोई अतिरिक्त आर्थिक लाभ का भी प्रावधान है?


उत्तर:- ये सभी लोग जानते हैं कि संस्थाएं अलाभकारी संगठन होते हैं। इनमें व्यक्तिगत रूप से कोई आमदनी नहीं होती और जो आमदनी होती है वह उद्देष्य पूर्ति में ही खर्च होती है अथवा मानदेय राषि या अनुदान राषियों के रूप में दी जा सकती है।


      संस्था की कार्यकारिणी में प्रस्ताव पारित बहुत पहले किया जा चुका है। जो भी उपहार या सेवाएं संस्था अपने स्वयं सेवकों को उपलब्ध कराती है वो सब हमें बाजार से क्रय करने होते हैं इसमें संस्था को आर्थिक हानि भी होती है। कई कंपनीयों से संपर्क भी किया मगर सफलता अभी तक नहीं मिली है। अब ये निर्णय किया गया है कि ‘षुभाकंाक्षा’ ऐन्टरप्राईजेज, जो 2007 से पंजीकृत फर्म है उसके माध्यम से ये व्यापारिक गतिविधि की जायेगी।


      इस फर्म के लिए कुछ साझेदारों को आमंत्रित किया गया है। इस फर्म के द्वारा व्यापारिक गतिविधि प्रारंभ होने पर इसके लाभांष में आजीवन सदस्यों और सामाजिक कार्यकत्र्ताओं की भी एक निष्चित मानदंड के अनुसार भागीदारी रहेगी।


      इस विषय में अलग से सभी परियोजना समन्वयकों को शीघ्र सूचित किया जायेगा।


प्रश्न 60:- अनुदान खाता अथवा पंजीकरण कोड वैबसाईट पर ब्लाॅक कब और क्यूॅ होता है? ब्लाॅक क्रमंाक को खुलवाने का क्या तरीका है?


उत्तर:- स्वयं सेवक का पंजीकरण रू. 250/- से और परियोजना समन्वयक का पंजीकरण रू. 2000/- से होता है। अगर इस राषि से कम राषि देकर पंजीकरण कराया गया होगा तो पंजीकरण तो हो जायेगा मगर ब्लाॅक रहेगा।


      जैसा कि कम्प्यूटर के अतिरिक्त मेन्यूवल लेन देन भी इसी अनुदान खाते में दर्ज होते हैं अतः अगर किसी स्वयंसेवक, समन्वयक का खाता ऋणात्मक हो जाता है तो कम्प्यूटर प्रविष्टि को स्वतः ब्लाॅक कर देगा।


      अगर किसी समन्वयक, कार्यकत्र्ता की तरफ कुछ बकाया राषि रहेगी तो वह उसका स्पष्टीकरण करेगा, भुगतान करने की दषा लिखित में देगा तो उस ब्लाक प्रविष्टि को प्रषासन द्वारा खोला जा सकता है।


      स्मरण रहे कि खाते में अनुदान राषि आने के लिए ब्लाॅक ऐन्ट्री में भी कोई रूकावट नहीं है केवल आहरण करने में ही रूकावट होती है। अतः ब्लाॅक ऐन्ट्रीज से बचे।


      इन ब्लाॅक ऐन्ट्रीज की सूची वैबसाईट पर उपलब्ध रहेगी और इस पर प्रतिक्रिया का समय एवं प्रतिक्रिया के निर्धारित समय के बाद की क्रिया भी वैबसाइट पर उपलब्ध रहेगी।


प्रश्न 61:- स्वयं सेवकों को दिये जाने वाले उपहार, सेवाएं कितने दिन बाद और कैसे उपलब्ध होते हैं?


उत्तर:- संस्था में वास्तविक शपथ - पत्र और नियमानुसार निर्धारित दानराषि जमा होने के 30 दिन के अंदर परियोजना समन्वयकों को उपहार प्रदान कर दिये जाते हैं। यद्यपि बीमा और पैन कार्ड की रसीद, सूची 60 से 90 दिन के अंदर उपलब्ध करा दी जाती है।


      स्मरण रहे कि पैन कार्ड परिचय पत्र में दिये गये नाम से ही बनता है और उसी पते के आधार पर सीधा पेन कार्ड कार्यालय से आता है। कई बार डाक में पैन कार्ड गुम हो जाता है इसकी जिम्मेदारी संस्था की कदापि नहीं होगी केवल रसीद देने तक की गारंटी रहेगी।


      बीमा भी तभी वैद्य होगा जब उसका निर्धारित शुल्क बीमा कंपनी में जमा हो जायेगा उससे पहले होने वाली किसी भी दुर्घटना की संस्था कोई जिम्मेदारी नहीं लेगी। यद्यपि तय समय सीमा में ही ये सेवाएं प्रदान करायी जाती है।


प्रश्न 62:- जो पुराने स्वयं सेवक जुड़े हैं अधिकतर कहते हैं कि परियोजना की ओपनिंग कब होगी?


उत्तर:- मुझे समझ नहीं आता कि लोग किस ओपनिंग की बात करते हैं। परियोजना तो वर्षों से चल रही है और जिसका जो मानदेय नियमानुसार बनता है वह दिया जा रहा है। समाचार पत्रों में, वैबसाईट पर, व्यक्तिगत पत्रों के माध्यम से, मौखिक रूप से सभी मुख्य सामाजिक कार्यकत्र्ताओं को एक बार नहीं, कई बार सूचित किया गया है कि अपनी नियमानुसार गतिविधियंा प्रारंभ करें मगर पता नहीं क्या मानसिकता है लोगों की, अपना कत्र्तव्य निर्वाह करते नहीं और फिजूल की बातों में वक्त बर्बाद करते हैं।


      ये जरूर है कि अभी परियोजना का राष्ट्रीय लोकार्पण नहीं हो पाया है उसका कारण यही है कि लोकार्पण कार्यक्रम में जो खर्चा होगा ना तो अभी उसका प्रबंध हो पाया और ना ही जिस प्रकार के व्यक्ति के हाथों उद्घाटन कराना है, ऐसा अभी निष्चित नहीं हो पाया है यद्यपि पूर्ण समर्पित होकर इस पर कार्य किया जा रहा है।


      जब तक लोकार्पण नहीं होता है नियमानुसार जो भी सामाजिक कार्यकत्र्ता अनुदान के पात्र है अपने खाते में शेष राषि का 50 प्रतिषत कभी भी आहरित किया जा सकता है। अथवा पूर्व में संस्था का कोई बकाया अगर है तो उसे समायोजित कराया जा सकता है।


प्रश्न 63:- परियोजना समन्वयकों और विभिन्न स्तर पर आजीवन सदस्यों, उपसमितियों के मुख्य कत्र्तव्य एवं जिम्मेदारियंा क्या हैं?


उत्तर:- आजीवन सदस्यों एवं उपसमितियों के कत्र्तव्य, पदाधिकार, नियम - शर्तें सब उनकी नियमावली में स्पष्ट किया जाता है। परियोजना समन्वयकों के मूल कत्र्तव्य निम्नलिखित हैं -


1.         सर्वप्रथम समाज में अपनी छवि साफ सुथरी रखनी चाहिए। विभिन्न प्रकार के नषे अन्य सामाजिक बुराईयों से दूर रहते हुए हमेषा समाजहित और देषहित में गतिषील बने रहना चाहिए।


2.         स्थानीय स्तर पर प्रषासन, पुलिस और जन प्रतिनिधियों को अपना विवरण प्रस्तुत करना अति आवष्यक है। संस्था से प्राप्त शुभकामना एवं स्वागत पत्र की एक प्रति महत्वपूर्ण कार्यालयों एवं व्यक्तियों को देकर उन पर पावती एवं हस्ताक्षर, यथा संभव मोहर लगाकर फाईल में रखना चाहिए।


3.         नये, पुराने सभी स्वयं सेवकों से संपर्क में रहते हुए उनके स्वागत पत्र, उपहारादि समयानुसार उन तक पहुचाॅने चाहिए तथा परियोजना में जोड़ने से पूर्व परियोजना के लाभ, उन लोगों के कत्र्तव्य स्पष्ट करते हुए उन्हें दी गई दानराषि कदापि वापिस देय नहीं है, अवष्य स्पष्ट कर देना चाहिए। स्वयं सेवकों को देष सेवा भावना से प्रेरित करना चाहिए।


4.         किसी भी राजनैतिक पार्टी के लिए काम न करते हुए केवल अच्छे जनप्रतिनिधियों को ‘संरक्षक मंडल’ में चुने फिर चाहे वो किसी भी राजनैतिक दल से संबद्ध हो। स्मरण रहे, हम देष के लिए कार्य कर रहे हैं तथा सभी जन प्रतिनिधि हमारे लिए सम्माननीय हैं।


5.         जो भी नये पंजीकरण/षपथ पत्र प्राप्त होते हैं उन्हें यथासंभव माह में 2 बार 10 से 15 तारीख एवं 25 से माह की अंतिम तारीख तक मुख्य कार्यालय आवष्यक रूप से भेज दें। स्वयं न आ सके तो डाक अथवा कोरियर द्वारा भेज सकते हैं।


6.         सबको अपना मानदेय मालूम है अतः जो दानराषि प्राप्त होती है उसमें अपना मानदेय लेकर निर्धारित प्रपत्र भरें बाकी राषि संस्था के पंजाब नेषनल बैंक, नरसिंहपुर (म.प्र.) के खाता सं. 2720001700001552 में जमा कर पावती की फोटो काॅपी संलग्न करें।


7.         हमेषा मुख्य कार्यालय, परियोजना प्रभारी के संपर्क में रहें।


8.         परामर्ष केन्द्रों के संचालक लोगों के कार्य करते हुए शालीनता का परिचय दें एवं कोई भी समस्या होने पर लिखित में ही कार्यवाही करें। अपने पदाधिकार, प्रैस संबंधित अधिकारों का दुरूपयोग न करें।


9.         समाज के अंतिम व्यक्ति तक बिना जाति, धर्म के भेदभाव के पहुॅचने का प्रयास करें। बेरोजगारों को, संस्था में जुड़ने को प्रेरित करें।


10.       समाज में छोटे, बड़े सभी प्रकार के व्यक्तियों से स्नेह, संपर्क एवं सहयोग बनायें रखें।


प्रश्न 64:- अपने अनुदान खाते से अनुदान राषि का आहरण करने के लिए कार्यों की सूची और कार्य के अनूरूप अनुदान राषि कितनी मिलेगी?


उत्तर:- जैसा पहले लिखा जा चुका है, सामाजिक कार्यों की कोई निष्चित सूची नहीं हो सकती ये असिमित है, इसी प्रकार अनुदान खाते में कितनी राषि कब होगी ये भी अनिष्चित है मगर प्रत्येक व्यक्ति हेतू अभी अनुदान राषि उसके संयुक्त अनुदान खाते के माध्यम से अधिकतम 10 लाख रूपये निर्धारित की गई है जो योजनानुसार आगे बढ़ायी गई है यद्यपि इससे कम नहीं होगी। यह अनुदान राषि देषवासियों के सामाजिक उत्थान के साथ-साथ देष के समग्र विकास हेतू प्रदान की जायेगी। कुछ मुख्य शर्तों की सूची निम्न प्रकार हैं-


1.         अनुदान खाते में उपलब्ध राषि की कम से कम 25 प्रतिषत राषि का उपयोग नये स्वयं सेवकों के पंजीकरण में ही समायोजन किया जायेगा और अपनी इच्छानुसार 50 प्रतिषत राषि जो घरेलू उत्थान हेतू है वह भी समायोजित की जा सकती है। इससे अधिक कदापि नहीं।


2.         स्वयं की, अथवा परिवार में शादी या अन्य समारोह होने पर उपलब्ध राषि का अधिकतम 50 प्रतिषत अनुदान लिया जा सकता है।


3.         विद्यालयों की फीस अथवा पुस्तकों हेतू अधिकतम 50 प्रतिषत अनुदान राषि आहरित की जा सकती है।


4.         घर में मरम्मत अथवा पुर्ननिर्माण में अधिकतम 50 प्रतिषत राषि आहरित की जा सकती है।


5.         स्वयं अथवा परिवार में बिमारी के इलाज हेतू अधिकतम 50 प्रतिषत राषि आहरित की जा सकती है।


6.         दुधारू पशु अथवा गौवंष पालन/क्रय हेतू अधिकतम 50 प्रतिषत राषि आहरित की जा सकती है।


7.         न्यूनतम 25 प्रतिषत अनुदान राषि निम्नलिखित गतिविधियों के लिए आरक्षित रहेगी। वृक्षारोपण, पानी सोख्ता गढ्ढा, सौर ऊर्जा, स्वच्छता कार्यक्रम, जन जागरूकता कार्यक्रम, दहेज प्रथा, बेटी बचाओ, जनसंख्या वृद्धि पर रोक, जल संरक्षण, आदि ये सब कार्य और देषहित के सभी कार्य करना एवं कराना।


इनकी अनुदान दर की सूची कार्य के अनूरूप अलग से प्रकाषित की जायेगी एवं वैबसाईट पर भी उपलब्ध करायी जायेगी। ये सब कार्य स्वयं भी करने हैं तथा स्वयं सेवक समूहों से भी कराने हैं। सबके लिए अनुदान प्रदान किये जायेंगे मगर किसी भी अनुदान की प्रथम शर्त यही है कि आपके अनुदान खाते में राषि उपलब्ध हो और आप निर्धारित प्रक्रिया पूर्ण कर, अनुदान प्राप्त करने के पात्र बन चुके हो।


8.         अतः कुल अनुदान राषि का 25 प्रतिषत नये पंजीकरण में समायोजन, 50 प्रतिषत राषि घरेलू आवष्यकताएं एवं 25 प्रतिषत अनुदान राषि का उपयोग केवल सामाजिक गतिविधियों में किया जायेगा। अनुदान खातों में ये राषि अलग - अलग शीर्ष में उपलब्ध होगी।


प्रश्न 65:- अगर कोई स्वयंसेवक अथवा सामाजिक कार्यकत्र्ता समाज विरोधी, देष विरोधी कार्याें में संलिप्त हो चोरी, नषा, जुआ जैसी कुसंगत में हो तो क्या उसे अनुदान मिलेगा?


उत्तर:- ऐसे व्यक्तियों को पहले लिखित में और प्यार से समझाकर पहले मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जायेगा। एक - दो बार अवसर प्रदान किया जायेगा, कोषिष की जायेगी वह सुधर जाए। अंततः उसका अनुदान बंद करके किसी अन्य को देने का भी प्रावधान है, मगर कोषिष रहेगी कि उसे सुधारा जाये। पैसे  के लालच में लोग सुधरेंगे भी।


प्रश्न 66:- किसी दुर्घटना की स्थिति में बीमा क्लेम कौन दिलवाता है? क्या इसके लिये कोई सेवा शुल्क देना होता है?


उत्तर:- वैसे तो संस्था का काम केवल दुर्घटना होने पर बीमा कंपनी को सूचित करना है तथा उसके बाद व्यक्ति को स्वयं बीमा कंपनी से पत्राचार करना होता है मगर एक आम व्यक्ति ये सब नहीं कर पाता है अतः बीमा क्लेम राषि का 10 प्रतिषत अथवा अधिकतम रूपये 1000/- (जो भी कम हो) सेवा शुल्क बीमित व्यक्ति से परियोजना समन्वयक, एवं संस्था के खर्चों के लिए दावा क्लेम करते समय लेने का प्रावधान है। इस प्रकार उनके व्यापार को विकसित कराये जाने का प्रावधान है।


प्रश्न 67:- क्या दुकानदारों, विभिन्न प्रषिक्षण केन्द्रों, व्यक्तिगत विद्यालयों, छोटे उत्पादकों आदि के लिए कोई विषेष सहायता प्रदान की जाती है?


उत्तर:- जी हाॅ, उन सबके लिए योजना है। सर्वप्रथम अपने प्रतिष्ठान के नाम से पंजीकरण करायेंगे तथा फिर उनके लिये अलग योजनाएं उनके कार्य के अनूरूप प्रदान की जायेगी।


प्रश्न 68:- विज्ञापन एवं पत्रकारिता और वर्गीकृत विज्ञापन आदि की क्या योजनाएं हैं?


उत्तर:- प्रकाषन और विज्ञापन संबंधित सभी कार्यों के लिए अलग विवरणिका प्रकाषित की जा रही है जो परियोजना समन्वयकों के पास उपलब्ध करायी जायेगी।


प्रश्न 69:- कई बार अत्यंत गरीब और असहाय व्यक्ति मिल जाते हैं, क्या परियोजना में उनकी शादी, समारोह या अन्य समस्याओं में कोई आकस्मिक सहायता प्रदान करने की योजना है?


उत्तर:- जी, इच्छा तो है मगर फंड पर निर्भर करता है। हमारा मूल उद्देष्य तो लोगों को सक्षम बनाना है मगर फिर भी फंड उपलब्ध होने पर समन्वयकों की संस्तुति पर ये सहायता प्रदान की जा सकती है। इन कार्यों के लिए अलग फंड बनाया गया है।


प्रश्न 70:- अगर कोई व्यक्ति पंजीकरण कराना चाहता है मगर उपहार कुछ नहीं लेना चाहता तो उसके लिए क्या प्रावधान है? क्या कुछ कम दानराषि ले सकते है?


उत्तर:- पहले ही लिखा जा चुका है कि अनुदान खाते की गणना रू. 250/- के हिसाब से ही की गयी है अतः इससे कम दानराषि नहीं ली जा सकती। अगर कोई व्यक्ति उपहार नहीं लेना चाहता तो शपथ पत्र पर और पावती पर लिख देना चाहिए कोई उपहार नहीं दिया गया। क्योंकि ये उपहार है, हम कुछ बेच नहीं रहे हैं।


      अगर रू. 250/- से कम की दानराषि होगी तो उसके अनुदान खाते में लिखा जायेगा और ऐंट्री ब्लाॅक रहेगी जब तक बकाया राषि जमा नहीं होगी। सभी प्रकार की प्रविष्टियों को स्वागत - पत्र दिया जाता है। जिस पर ये सब विवरण लिखा होगा। अर्थात अगर परियोजना समन्वयक उपयुक्त समझता है तो निर्धारित दानराषि से कम राषि होने पर भी पंजीकरण किया जा सकता है, मगर यह स्पष्ट करना चाहिए की कौनसा उपहार प्रदान किया गया है अथवा उपहार लेने से इंकार किया गया है। ऐसे व्यक्तियों को रू. 100/- नकद गिफ्ट वाऊचर देने का प्रावधान भी है।


प्रश्न 71:- अनुदान खातों का नवीनीकरण कैसे होगा? रू. 10 लाख पूरा होने पर क्या कार्यवाही होगी? बीमा अगर कोई चाहे तो कैसे नवीकरण करायेगा?


उत्तर:- किसी भी अनुदान खाते में प्रथम नवीनीकरण केवल तब होगा जब उस स्वयं सेवक को रू. 10 हजार का अनुदान मिल चुका होगा शर्त है कि पंजीकरण किये हुए कम से कम 1 वर्ष पूरा हो चुका हो। नवीनीकरण की प्रक्रिया वर्ष में केवल 1 बार 31 मार्च को ही होगी। नवीनीकरण में रू. 250/- की दानराषि दोबारा जमा होगी जो नकद नहीं अपितू अनुदान खाते से समायोजित की जायेगी। इसके बाद प्रत्येक 10 हजार के अनुदान के पश्चात् स्वतः नवीकरण होता रहेगा। स्मरण रहे कि नवीकरण वर्ष में केवल 1 बार 31 मार्च को ही होगा और इस मध्य अगर अनुदान 10 हजार रू. या अधिक दिया जा चुका है तो ठीक है अन्यथा फिर अगले 31 मार्च को ही होगा।


      10 लाख रू. का अनुदान किसी भी स्वयंसेवक को संयुक्त खातों, और संयुक्त योजनाओं से मिलने के पश्चात खाता स्वतः मृत हो जायेगा तथा इसके बाद यह पूर्व स्वयं सेवक की अनुषंसा पर किसी अन्य व्यक्ति का स्थानांतरित कर दिया जायेगा अगर कोई अपने बच्चों के नाम से स्थानांतरित करायेगा और बच्चे का अनुदान खाता पहले से ही होगा तो उसमें ही समाहित कर दिया जायेगा।


      जब भी कोई खाता किसी दूसरे नाम पर स्थानांतरित होगा तो उस खाते की सभी औपचारिकताएं भी दोबारा करनी होगी। यद्यपि रू. 10 लाख का अनुदान पूर्ण होने से पहले स्वयं सेवक की मृत्यु की दषा में नामंाकित व्यक्ति को निषुल्क स्थानांतरित होगा और दोबारा औपचारिकताएं नहीं करनी होगी।


      अगर किसी को अपना बीमा नवीनीकरण कराना है तो दोबारा स्वयं सेवक का पंजीकरण कराना होगा। ये हो सकता है किसी भी नाम से कराये मगर बीमा घर में किसी का भी कराया जा सकता है।


      बीमा नवीनीकरण स्वयंसेवक को स्वयं कराना होगा अर्थात संस्था स्वयंमेव किसी भी स्वयं सेवक का, सामाजिक कार्यकत्र्ता का बीमा नवीनीकरण नहीं करायेगी।


प्रश्न 72:- अगर संस्था ही भंग हो गयी तो अनुदान खातें तो सब बंद हो जायेंगे, फिर क्या होगा?


उत्तर:- संपूर्ण परियोजना को शत प्रतिषत आॅनलाईन कर दिया गया है, सीधा बैंक से अनुदान खातों को जोड़ा जायेगा और निर्धारित लक्ष्यों को पूर्ण होने पर स्वतः अनुदान खातों में बैंकों के माध्यम से अनुदान आयेगा और जमा भी सीधा बैंक में ही होगा।


      अर्थात् ये पूर्णतः स्वचालित परियोजना बनायी जायेगी। इसका संपूर्ण प्रषासन स्वसंचालित किया जायेगा। आप लोग विष्वास रखिये, यद्यपि वर्तमान समय में हम लोगों तक, सरकारों तक पहुॅच बनाने में संघर्षरत हैं मगर आने वाले समय में ये योजना केन्द्र सरकार के अधीन होनी सुनिष्चित है और संस्था का स्वयं का बैंक ही इसे संचालित करेगा। ये शत प्रतिषत अकाट्य सत्य है तभी साम्यवाद स्थापित हो पायेगा।


प्रश्न 73:- प्रष्न - 58 में ‘षुभाकंाक्षा’ एंटरप्राईजेज के बारे में लिखा है, इसमें किस प्रकार कार्य किया जा सकता है? साझेदारों के लिए, सामाजिक कार्यकत्र्ताओं के लिए क्या नियम शर्तें एवं अन्य प्रावधान हैं? कृपया स्पष्ट करें।


उत्तर:- जैसा कि हम सब लोग जानते हैं कि सामाजिक संस्थाएं अलाभकारी संगठन होते हैं तथा इनमें जो दानराषि अथवा अनुदान या किसी भी अन्य स्रोत से धनराषि आती है तो वह किसी की व्यक्तिगत नहीं होती अपितू संस्था द्वारा निष्चित किये गये विभिन्न उद्देष्यों की पूर्ति में ही खर्च किये जाने हेतू होती है। हम ‘जन संसधन विकास एवं जीव कल्याण समिति’ के माध्यम से ‘स्ववित्तपोषित - स्वरोजगार’, गरीबी उन्मूलन राष्ट्रीय परियोजना ‘षुभाकंाक्षा’ का संचालन पिछले कई वर्षों से कर रहे हैं, इसमें जो भी मानदेय राषियंा अथवा अनुदान आदि स्वयं सेवकों, सामाजिक कार्यकत्र्ताओं और पदाधिकारियों को प्रदान किया जाता है। वह केवल किये गये सामाजिक कार्यों के अनुरूप ही दिया जाता है तथा भविष्य में भी केवल इसी प्रकार दिया जायेगा।


      लेकिन हम सब जानते हैं कि समन्वयकों, सामाजिक कार्यकत्र्ताओं और अन्य पदाधिकारियों को अपने खर्च चलाने हेतू एवं अन्य प्रकार के खर्चों के लिए भी पैसा चाहिए इसके लिए कुछ अलग गतिविधियों में शामिल होना आवष्यक हो जाता है। अतः पूरी तरह सामाजिक कार्यों में समर्पित नहीं हो पाते हैं।


      हमने संस्था के पदाधिकारियों और आजीवन सदस्यों के समक्ष ये प्रस्ताव रखा। सबने एकमत से प्रस्ताव को पारित किया और ये निष्चय किया गया कि परियोजना में उपहार एवं सेवाओं को प्रदान करने हेतू एक कंपनी का गठन एवं पंजीकरण करके वैधानिक रूप से अधिकृत किया जाये और अगर कुछ टैक्स आदि बने तो सरकार को दिया जाये।


      हमारे पास ‘षुभाकंाक्षा एंटरप्राईजेज’ पार्टनरषिप फर्म हैं जो जुलाई 2007 से पंजीकृत है। हमने इस फर्म में ही आवष्यक बदलाव करने का निष्चय किया है। अर्थात् इसमें कुछ गतिषील और विषेष स्वयं सेवकों एवं सामाजिक कार्यकत्र्ताओं को निष्चित मानदंडों के अनुसार साझेदारी प्रदान की जायेगी और समयानुसार, आवष्यकतानुसार इसे कंपनी एक्ट में पंजीकृत कराया जायेगा।


      हमारी इस कंपनी को संपूर्ण भारतवर्ष में संचालन हेतू एक करोड़ रूपयों की लागत की परियोजना है और वर्तमान में इसकी लागत 50 लाख हो चुकी है अर्थात् इसकी 50 प्रतिषत हिस्सेदारी लोगों में प्रदान की जायेगी एवं 50 लाख रूपये लोगों से ऋण के रूप में लिया जायेगा।


      हम जानते हैं कि आजकल विभिन्न कंपनीयंा बाजार में आती है और लोगों से विभिन्न वायदे कर पैसा लेती है, कुछ मिलता है, कुछ पर सरकारी षिकंजे कसते हैं, कुछ के ताले बंद होते हैं, कुल मिलाकर ‘कंपनी’ नाम की छवि खराब होती जा रही है। मुख्य कारण है कि कंपनीयंा जो धनराषि वापसी का वायदा करती हैं वो सब उनके व्यापार पर आधारित होता है अर्थात परिकल्पित गणना होती है। खैर, इन सब बातों पर हम वाद विवाद नहीं करेंगे। किसी भी कंपनी की अपनी जिम्मेदारी एवं सोच होती है वो लोग जाने।


      हम लोगों का पैसा अवष्य लेंगे मगर इस प्रकार लेंगे कि उन्हें ब्याज सहित पैसा वापिस मिले और साथ में कुछ ऐसे लाभ हो जो आगे भी मिलते रहे। बाजार का जो भी उतार चढ़ाव होता है वह हम स्वयं भुगतेंगे क्योंकि काम हम कर रहे हैं, भोली, गरीब जनता को नहीं फॅसायेंगे। सरकार और सरकारी बैंकों से सहायता ली जा सकती है मगर हमारे पास इन सबके चक्कर काटने का समय बिल्कुल नहीं है। अतः हमने योजना बनायी है जिसमें जो लिखा है वह शत् प्रतिषत सही है। हम अपनी धनराषि एकत्रित करेंगे, अपने उत्पादन करेंगे और मार्केटिंग करेंगे जो बचत होगी व स्वयं के लिए, ऋणदाताओं के लिए और देष हित में लगायेंगे।


      परियोजना के ट्राॅयल के दौरान पिछले वर्षों में हम लगभग 50 लाख रूपये विभिन्न प्रकार के उपहारों अथवा स्वयं सेवकों की सेवाओं पर जैसे बीमा, पैनकार्ड आदि पर खर्च कर चुके हैं। मैं समझता हूॅ कम से कम 15 से 20 लाख रूपये कुछ गिनती के व्यापारियों ने हम से अवष्य ही कमाये होंगे और अब हम इस परियोजना का विस्तार संपूर्ण भारत में करने जा रहे हैं तो आवष्यक रूप से हमें करोड़ों के उपहार आदि बाजार से खरीदने होंगे।


      अब सोचने वाली बात यह है कि जब हम यह जान चुके हैं कि ये सब होने वाला हैं, हमें करोड़ों की नहीं बल्कि असिमित खरीदी करनी ही है तो क्यों न स्वयं की कंपनी से ही ये सब किया जाये और इसमें जो लाभांष हो उसे भी एक निष्चित मापदंड से कार्यकत्र्ताओं को लाभंावित किया जाये। विभिन्न वस्तुओं के उत्पादन किये जायें मार्केटिंग की जाये और 1-2 को नहीं बल्कि संपूर्ण देषवासियों को इसका लाभ दिया जाये।


      मेरी जहां तक बात है, जो लोग मेरे साथ अभी तक जुड़े है, जो आजीवन सदस्य, परियोजना समन्वयक, कार्यकत्र्ता और स्वयं सेवक मेरे साथ बैठ चुके हैं वो सब अच्छी प्रकार जानते हैं कि मैं हमेषा टीम भावना से कार्य करता हॅू। कई प्रकार की कंपनियां मेरे संपर्क में आती रहती हैं तथा व्यक्तिगत रूप से मुझे प्रलोभन भी दिया जाता है मगर मैं स्वयं से पहले अपनी टीम का भला सोचता हूॅ मेरा तो यही मानना है कि अगर सबका साथ हमें चाहिए तो सबका विकास भी होना चाहिए।


प्रश्न 74:- ‘षुभाकंाक्षा’ में ऋण, ब्याज दर, समय विकल्प एवं ऋण अदायगी किस प्रकार होगी?


उत्तर:- ऋण प्राप्ती और ब्याज सहित अदायगी के विकल्प की सारणी परियोजना समन्वयकों के पास उपलब्ध है।


प्रश्न 75:- ‘षुभाकंाक्षा एन्टरप्राईजेज’ को यथासमय कंपनी एक्ट में पंजीकृत कराया जायेगा, इसमें हिस्सेदारों के प्रतिषत किस आधार पर रखे जायेंगे? इससे होने वाले लाभ को किस अनुपात में बाॅटा जायेगा? ऋण संकलन कत्र्ताओं को क्या अतिरिक्त लाभ होगा?


उत्तर:-


1.          सामाजिक कार्यकत्र्ताओं के द्वारा उपरोक्त योजना के अंतर्गत संस्था की गतिविधियों के संचालन हेतू अधिकतम रू. 50 लाख का संग्रह किया जायेगा। यह धनराषि संस्था के बैंक खाते में जमा की जायेगी तथा जनता का ऋण कहलायेगा जो निष्चित योजना के अनूरूप ब्याज सहित वापिस किया जायेगा। ये राशि आवश्यकतानुसार ली जायेगी।


2.          ऋणदाता को निर्धारित प्रारूप पर सहमति देते हुए वंाछित विकल्प को पहले ही चुनना होगा तथा उन्हें निर्धारित प्रारूप पर ऋण अदायगी का गारंटी पत्रक ऋण प्राप्त होने के 15 दिन के अंदर पंजिकृत डाक द्वारा पे्रषित कर दिया जायेगा।


3.          रू. 5000/- से कम ऋणदाता को स्वपोषित, स्वरोजगार गरीबी उन्मूलन परियोजना में स्वयं सेवक का पंजीकरण कराके अनुदान खाता खोलना अनिवार्य होगा। इस हेतू रू. 250/- की दानराषि अलग से देनी होगी।


4.          रू. 5000/- या इसके ऊपर ऋणदाता का पंजीकरण ‘षुभाकंाक्षा’ परियोजना में संस्था द्वारा किया जायेगा।


5.          जिस अवधि के लिए ऋण दिया गया है, बाद में उस अवधि को बढ़ाया जा सकता है अर्थात अधिक अवधि का विकल्प बदला जा सकता है।


6.          क्योंकि आप जानते हैं कि ये ऋण व्यापारिक गतिविधियों में इन्वेस्ट हो जायेगा तथा पुर्नभुगतान की योजना बनायी जा चुकी है अतः समय से पहले भुगतान नहीं किया जायेगा।


7.          ऋणअदायगी की दिनंाक सभी ऋणदाताओं को गारंटी कार्ड पर लिख कर अग्रिम प्रदान की जायेगी। किसी भी दषा में दिये गये समय पर ऋण भुगतान किया जायेगा। बिना किसी उचित कारण के ऋण भुगतान में अनावष्यक विलंब पर ऋणदाता देय राषि पर 10 प्रतिषत प्रतिमाह तक का अर्थदंड वसूल करने का एवं एक माह से अधिक विलम्ब होने पर अदालती कार्यवाही करने का अधिकारी होगा, यद्यपि भुगतान देय तिथि को ही किया जायेगा।


8.          प्रतिवर्ष व्यापारिक गतिविधियों से फर्म/कंपनी को होने वाले शुद्ध लाभ में वितरण हेतू अलग - अलग पूल बनेंगे। 10 प्रतिषत शुद्ध लाभ संस्था में आजीवन सदस्यों एवं संरक्षक मंडल में अनुदान खाते के माध्यम से आबंटित होगा।


9.          शुद्ध लाभ का 10 प्रतिषत ऋणदाताओं में आबंटित किया जायेगा। ऋणदाताओं को ऋण वापिस करने के बाद उनका नाम पूल में लिखा जायेगा तथा रू. 1000/- को एक शेयर मानते हुए ऋणदाताओं को यह लाभ प्रतिवर्ष अनुदान के रूप में उनके अनुदान खाते के माध्यम से प्रदान किया जायेगा।


10.        10 प्रतिषत स्वयंसेवक पूल, 10 प्रतिषत परियोजना समन्वयक/सामाजिक कार्यकत्र्ता पूल में शुद्ध लाभ आबंटित होगा। ये सब धनराषियंा अनुदान खाते के माध्यम से और परियोजना के नियमों के अनुसार प्रदान किया जायेगा।


11.        पहले शुभाकंाक्षा एंटरप्राईजेज के माध्यम से परियोजना को राष्ट्रीय स्तर पर सेवा प्रदान की जायेगी तथा निर्धारित 50 लाख रू. ऋण का लक्ष्य पूरा होने पर इसे कंपनी एक्ट में पंजिकृत कराया जायेगा तथा योजनानुसार शेयर सामाजिक कार्यकत्र्ताओं, ऋण संकलन कत्र्ताओं और अन्य हिस्सेदारों को प्रदान किये जायेंगे। कंपनी को पंजिकृत कराने से पहले ऋणमुक्त किया जायेगा अर्थात ऋण के पुर्नभुगतान की राषि बैंक में जमा करदी जायेगी।


12.        ऋण संकलनकर्ता सामाजिक कार्यकत्र्ताओं को पहले 1 लाख के ऋण संकलन पर 2 प्रतिषत तथा इससे आगे प्रति 1 लाख पर 1 प्रतिषत की हिस्सेदारी कंपनी में स्थायी प्रदान की जायेगी तथा यह हिस्सेदारी अधिकतम 5 प्रतिषत होगी। 5 प्रतिषत हिस्सेदारी वाले संकलनकत्र्ता को परियोजना समन्वयक होना आवष्यक है तथा उन्हें यथासंभव बोर्ड आॅफ डायरेक्टर्स में स्थान प्रदान किया जायेगा। स्मरण रहे समय सीमा के महत्व को समझते हुए प्रथम 1 लाख का लक्ष्य, 1 माह में होना आवष्यक है।


13.        यद्यपि कंपनी के सभी हिस्सेदार लाभ और हानि के भी अनुपातिक आधार पर हिस्सेदार होते हैं मगर इस परियोजना का मैं स्वयं सूत्रधार हूॅ अतः ऋणअदायगी, धनराषि का सदुपयोग और शेयर आबंटन का मैं स्वयं को पूर्ण रूप से जिम्मेदार मानता हूॅ तथा ये सब मेरी जिम्मेदारी रहेगी एवं कंपनी संचालन, प्रषासनिक नियम शर्तों, पर मेरी राय ही अंतिम रूप से मान्य होगी। यद्यपि शुद्ध तर्क - वितर्क किया जा सकता है।


14.        अगर कोई ऋण दाता अपने चुने हुए विकल्प से पहले किसी कारण वष या विवषता वष, ऋण अदायगी चाहता है तो उसे कम से कम 3 माह का समय देना होगा और उसे नये विकल्प के अनुसार राषि लौटाने का पूर्ण प्रयास किया जायेगा। इस स्थिति में प्रथम विकल्प के अनुसार राषि लौटाने का पूर्ण प्रयास किया जायेगा। इस स्थिति में प्रथम विकल्प वाले ऋण दाताओं को 3 माह के नोटिस पर मूल धन वापिस किये जाये का पूर्ण प्रयास होगा, यद्यपि इन मामलों में कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की जा सकेगी।


15.        जिस महीने विकल्प का समय पूरा होगा, उस महीने की अंतिम दिनंाक भुगतान की दिनंाक कहलाएगी।


16.        50000 से ऊपर किसी एक व्यक्ति से ऋण न लेने की प्राथमिकता है अपितु उपयुक्त व्यक्ति मिलने पर अधिक राषि भी ली जा सकती है। मगर स्मरण रहे हम प्रथम चरण में अधिकतम 50 लाख रू. का ऋण ही संग्रहीत करेंगे और आषा करते हैं कि आगे लोगों से राषि नहीं लेनी पड़ेगी।


17.        25000 या इससे अधिक देय राषि होने पर भुगतान तिथि का राषि सहित चैक ऋणदाता को अग्रिम ऋण पत्र के साथ में जमानत के तौर पर दिया जायेगा।


18.        स्मरण रहे हम कोई लेन देन की योजना संचालित नहीं कर रहे हैं, सीधे अर्थ में संस्था अपनी योजना के संचालन हेतू कुछ विषिष्ट सामाजिक कार्यकत्र्ताओं के द्वारा एकत्रित की गई ऋण राषि एक निष्चित सीमा में ले रहे हैं और ऋण दाताओं को ब्याज सहित वापिस करते हुए लाभंाष में हिस्सेदारी के विकल्प पर काम करेंगे।


19.        किसी भी प्रकार के वाद विवाद की स्थिति में न्यायिक क्षेत्र केवल संस्था के द्वारा निर्धारित किया जायेगा। ऋणदाता और प्राप्तकत्र्ता दोनों पक्ष नियमों का पूर्णतः पालन करने पर पूर्णतः बाध्य हैं।


प्रश्न 76:- अगर कोई सामाजिक कार्यकत्र्ता, परियोजना समन्वयक, उपसमिति, परियोजना के सुचारू रूप से संचालन हेतू अग्रिम उपहार चाहते हैं तो क्या प्रक्रिया होगी?


उत्तर:- अग्रिम उपहार हेतू रू. 150/- प्रति उपहार जमानत राषि संस्था में जमा करनी होती है। 50 से कम उपहार कार्यकत्र्ता को स्वयं उपहार केंद्र से ले जाने होंगे, 50 या अधिक होने पर नजदीकी ट्रांसपोर्ट तक भेजे जाते हैं। उपहार वापिस कर कभी भी जमा राषि वापिस ली जा सकती है। इसी प्रकार अगर कोई समन्वयक दूर दराज के क्षेत्रों में काम करता है तो उसे भी कम से कम 50 नये उपहार वाले पंजीकरण करने पर भी ट्रंासपोर्ट द्वारा भेजे जाते हैं अतः अगर सुचारू रूप से कार्य करना है तो कम से कम 50 उपहार जमानत राषि जमा करके अग्रिम लेने चाहिए।


प्रश्न 77:- जैसा कि बताया गया है कि स्वतंत्र प्रभार परियोजना समन्वयक को कम से कम रू. 10,000/- जमानत राषि जमाकर, प्रषिक्षणोपरंात पैकेज लेकर अपना कार्यालय चलाना होगा अगर कोई व्यक्ति जमानत राषि हेतू रू. 10,000/- का प्रबंध नहीं कर पाता और कार्य करने का इच्छुक है तो वह कैसे कर पायेगा?


उत्तर:- जमानत राषि के एवज में ही उपहारादि प्रदान किये जाते है, जैसा कि पूर्व में बताया गया है हम ‘स्ववित्तपोषित - स्वरोजगार’ परियोजना का संचालन कर रहे हैं। लेकिन जमानत राषि न होने पर अथवा कम होने पर रू. 150/- प्रति गिफ्ट के हिसाब से भी अपने नजदीकी शाखा कार्यालय में जमानत राषि जमा करके उपहार प्राप्त किये जा सकते है। इसके लिए कितने उपहार लिये जायेंगे ये कोई निष्चित नहीं हैं। अगर कोई नजदीक में दूसरा स्वतंत्र प्रभार समन्वयक का केन्द्र स्थापित है तो उस से भी मिलकर काम कर सकते हैं।


प्रश्न 78:- जब लोगों को मुफ्त में बराबर आर्थिक सहायता मिलती रहेगी तो क्या आम आदमी निष्क्रिय नहीं जायेगा? लोग काम क्यूं करेंगे?


उत्तर:- हम कोई भी अनुदान मुफ्त में नहीं देने वाले हैं। योजना का स्वरूप पढ़िये। केवल सामाजिक कार्यों के अनूरूप पैसा मिलेगा। अपने बच्चों को षिक्षित करना, स्वरोजगार करना, स्वयं का विकास करना, असहाय लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुॅचाना, ये सब सामाजिक काम ही तो हैं और फिर हमारे अनुदान से जिन्दगी नहीं कट सकती है ये केवल लोगों को सफल बनाने हेतू आर्थिक सहायता है ताकि लोग जो चाहते हैं वो प्राप्त कर सकें। इस आर्थिक सहायता की एक सीमा भी निष्चित की गई है।


प्रश्न 79:- क्या संस्था ने विभिन्न सरकारी विभागों से इस परियोजना के संचालन की अनुमति प्राप्त की है?


उत्तर:- हमें पता है कि कोई भी सामाजिक संस्था का गठन कुछ निष्चित उद्देष्यों के साथ भारत सरकार में पंजिकृत कराके किया जाता है जोकि वैधानिक प्रक्रिया है। हमने संपूर्ण दस्तावेजों के साथ अपना सरकार में पंजीकरण कराया है।


       सामाजिक संस्थाएं दान, अनुदान अथवा ऋण लेकर अपने उद्देष्यों हेतू कार्य करती है तो हम भी वो ही कर रहे हैं। हमारे उद्देष्यों में स्पष्ट है कि लोगों से, सरकार से दान, अनुदान आदि लेकर जरूरतमंद लोगों के लिये विभिन्न आर्थिक सहयोग के विकल्प तैयार करना है तो हम वो ही कर रहे हैं। अब इसमें अलग से कोई अनुमति लेने का क्या तात्पर्य है?


       दूसरी बात है कि हमने संस्था के गठन के समय ही भारत के योजना आयोग एवं शासन प्रषासन को लिखित सूचना प्रदान करते हुए योजना का संक्षिप्त प्रारूप प्रेषित कर दिया था। जहंा तक मैं समझता हूॅ, सामाजिक उत्थान के किसी भी कार्यक्रम की अलग से कोई अनुमति की आवष्यकता नहीं है, सूचित करना हमारा कत्र्तव्य है। अनुमति लेने चलेंगे तो अपनी बात को समझाते ही रह जायेंगे।


       इसलिए हमने सभी स्तर पर परियोजना की सूचना प्रदान करके अपना कार्य प्रारम्भ किया था और आज हम यह माॅडल तैयार करने में सफल हो पाये हैं।


       हम तो चाहते हैं कि सरकार हमें बुलाए और इस माॅडल पर जानकारी ले, कहीं भी कुछ गैर कानूनी है तो सलाह देकर सही करवायें अन्यथा इसे अधिग्रहित करें।


       एक राष्ट्रप्रेमी होने के नाते हमने अपने देषवासियों के लिए योजना बनायी और देष को ही समर्पित है। हाॅ अगर हम अन्य देषों में इस का विस्तार करना चाहेंगे तो विभिन्न प्रकार की सरकारी अनुमतियों की आवष्यकता हो सकती है और वो सब हमे नहीं करना है।


प्रश्न 80:- जब कोई व्यक्ति क्षेत्र भ्रमण करता है। कुछ परियोजना संबंधित कार्य करता है तो कई बार देखने को मिलता है कि कुछ असामाजिक तत्व उन्हें परेषान करते हैं, दबंगई दिखाते हुए कार्य नहीं करने देते अथवा व्यवधान पैदा करते हैं। कई बार जातिगत समस्यायें भी देखने को मिलती है, कई लोग ईष्र्यावष भी कार्यकत्र्ताओं के समक्ष व्यवधान पैदा कर देते हैं तो इस प्रकार की समस्याओं से निपटने हेतू क्या प्रावधान है?


उत्तर:- वास्तव में यह एक अति गंभीर समस्या है, मैंने व्यक्तिगत भी कई बार इसे अनुभव किया है। मगर डरने वाली कोई बात नहीं है। एक बहुत पुरानी कहावत है ‘साॅच को आॅच नहीं’। धैर्य और साहस से काम लेंगे तो सभी समस्याओं का निदान संभव है।


प्रश्न 81:- अगर कोई सदस्य संपूर्ण भारतवर्ष में दूर - दूर के क्षेत्रों में परियोजना के विस्तार हेतू सदस्य जोड़ता है तो उसके लिए क्या कार्यवाही करनी होगी?


उत्तर:- ऐसे सदस्यों को फोन द्वारा सूचित करके उनसे मंगाकर या स्वयं उसका शुल्क संस्था में जमा करायें तथा ऐसे सभी सदस्यों के फोन नं. तथा पत्र - व्यवहार के पते कार्यालय में जमा करायें। प्रत्येक स्थान पर आपका समूह विकसित करने में संस्था का पूर्ण योगदान रहेगा। ध्यान रहे कि जिन सदस्यों का शुल्क संस्था में जमा हो जायेगा उनसे ही संस्था द्वारा सीधा संपर्क बनाया जा सकता है।


प्रश्न 82ः- अगर कंपनी भाग गई तो क्या होगा?


उत्तर:- यह एक आम प्रष्न है, कोई भी व्यक्ति यह बोलता है। इसके उत्तर में पहले तो आप यह समझ लें हम एक सामाजिक संस्था के रूप में कार्य कर रहे हैं। कंपनी के मालिक कुछ लोग होते हैं जबकि संस्था एक सार्वजनिक उपक्रम है जिसे कुछ लोगों की समिति संचालित करती है और इसका स्वामित्व सरकार के हाथों में होता है। दूसरी बात यह है कि संस्था में प्रायोजक और प्रतिनिधियों को नकद प्रदान किया हुआ शुल्क काटकर लगभग रू. 150/- ही प्रति सदस्य जमा होता है जिससे प्रत्येक सदस्य को उसकी जरूरत का लगभग रू. 250/- की बाजार कीमत का सामान भी उपहार में मिल जाता है। अतः इस परियोजना में जुड़ने पर किसी भी प्रकार कि हानि न तो आपको है न ही आपके द्वारा जोड़े गये किसी सदस्य को है। सदस्य जुड़वाने वाले सदस्यों को उनका लाभंाष अग्रिम मिल जाता है। कोई भी दुर्घटना की स्थिति में उपहार में अगर बीमा है तो  कंपनी से सीधे संपर्क करके बीमाराषि क्लेम की जा सकती है। फिर भागने का डर क्यों ? आपका संस्था की परियोजना में प्रवेष लगभग निषुल्क हो रहा है। फिर डरने की आवष्यकता नहीं होनी चाहिए। याद रखें कि अगर पानी में पैर रखने का साहस नहीं करोगे तो तैरना कभी नहीं सीखा जा सकता। 


प्रष्न 83ः- अगर कोई व्यक्ति पत्रकारिता या विज्ञापन क्षेत्र में कार्य करने के लिए संस्था द्वारा प्रकाषित समाचार पत्र ‘स्वयम् सहारा‘ का संचालन करें उसे परिचय पत्र के लिए कितनी धनराषि जमा करनी होगी ?


उत्तर:- पत्रकारिता और विज्ञापन के क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों के लिए हमारे पास बहुत ही अच्छी योजना है। हम केवल जन समस्याओं पर आधारित पत्रकारिता, षिक्षा पर लेख आलेख आदि लिखने में विष्वास करते हैं। पत्रकारिता क्षेत्र में कार्य करने के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता। यद्यपि परियोजना समन्वयकों की षिक्षा एवं रूचि के आधार पर भी चुनाव किया जाता है। इस क्षेत्र में काम करने के इच्छुक लोगों को प्रषिक्षण के दौरान सब कुछ स्पष्ट किया जाता है। अतः सर्वप्रथम परियोजना समन्वयक की औपचारिकताएं पूर्ण किये जाना आवष्यक है।

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